Friday, July 30, 2021

 

 

 

11 साल बाद इरशाद और कमर आतंक के आरोप से किया बरी, कोर्ट ने पुलिस जांच पर उठाए सवाल

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आतंक के आरोप में फ़साये गए दो मुस्लिम नौजवान 11 साल बाद आतंक के आरोप से बरी हो गए. इरशाद अली और मऊरीफ कमर को 2006 के एक आतंकी मामले में गिरफ्तार किया गया था. दोनों को दिल्ली सेशन कोर्ट ने बरी कर दिया.

इन दोनों को 9 फरवरी 2006 को दिल्ली के मुकरबा चौक से गिरफ्तार किया गया था. दोनों ही लोग जम्मू से आ रही एक बस से उतरे थे. पुलिस की स्पेशल सेल ने दावा किया था कि दोनों के पास से हथियार भी बरामद किए गए थे. स्पेशल सेल का दावा था कि दोनों आरोपी अल-बद्र ग्रुप के मिलिटेंट्स थे और उनकी गिरफ्तारी के समय हथियार भी बरामद किए गए थे. लेकिन  ट्राइल के 11 साल बाद दिल्ली की सेशन कोर्ट ने दोनों को बरी कर दिया.

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मामले में प्रॉसिक्युशन अपना केस साबित नहीं कर पाया है. इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले में स्पेशल सेल अपना दावा साबित नहीं कर पाया है. कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच के समय क्राइम टीम द्वारा जगह का मुआयना करने की कोई कोशिश नहीं की गई और न ही स्पेशल सेल बरामद किए गए हथियारों पर कथित आरोपियों के फिंगरफ्रिंट्स मैच करा पाई.

केस पर एडिशनल सेशन जज रितेश सिंह ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मामले में बताई गई जगह (गिरफ्तारी स्थल) के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई.  पुलिस रेड में इस्तेमाल की गई प्राइवेट कार्स के बारे में भी कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया. मामले में पुलिस द्वारा कोई गवाह जोड़ने की कोशिश नहीं की गई.

फैसले के मुताबिक न ही उस बस जिसमें कथित तौर पर पूर्व आरोपियों के सवार होने का दावा किया गया था, के ड्राइवर को मामले में बतौर गवाह पेश किया गया था न ही बस की कोई टिकट बरामद की गई.

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