लखनऊ. राजधानी लखनऊ के मुमताज डिग्री कॉलेज में चली ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) की बैठक तीन घंटे बाद समाप्त हो गई। बैठक के बाद जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि हम फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन (पुनर्विचार या समीक्षा याचिका) दायर करेंगे।

उन्होंने कहा कि इस बात की 100 फीसद संभावना है कि कोर्ट में हमारी याचिका खारिज हो जाए लेकिन फिर भी इस मामले को कोर्ट लेकर जाएंगे। यह हमारा कानूनी हक है। अरशद मदनी ने कहा कि हम न मस्जिद को दे सकते हैं और न ही उसकी जगह कोई जमीन ले सकते हैं। मुकदमे में हमें हमारा हक नहीं दिया गया। मामले में जमीयत उलेमा-ए-हिन्द रिव्यू पिटीशन दाखिल करेगी।

वहींए आईएमपीएलबी के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा, ‘‘शरई वजहों से दूसरी जगह पर मस्जिद की जमीन कबूल नहीं करेंगे। हमें वही जमीन चाहिए, जिसके लिए लड़ाई लड़ी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कई अंतर्विरोध हैं। जब बाहर से लाकर मूर्ति रखी गई तो उन्हें देवता कैसे मान लिया गया? जन्मस्थान को न्यायिक व्यक्ति नहीं माना जा सकता। गुंबद के नीचे जन्मस्थान का प्रमाण नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि वहां नमाज पढ़ी जाती थी। हमें 5 एकड़ जमीन नहीं चाहिए।’’

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जिलानी ने यह भी कहा कि अयोध्या में 27 मस्जिद हैं। बात मस्जिद की नहीं है। जमीन के हक पर लड़ाई है। 30 दिन के अंदर रिव्यू फाइल करना होता है, जिसे हम कर देंगे। बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी पर जिला प्रशासन और पुलिस दबाव डाल रही है। हाजी महबूब की भी सहमति मिली है।

हालांकि सुन्नी वक्फ बोर्ड और मामले के पक्षकार इकबाल अंसारी ने बैठक का बहिष्कार किया। इकबाल अंसारी ने कहा- हम हिंदुस्तान के मुसलमान हैं और हिंदुस्तान का संविधान भी मानते हैं। अयोध्या केस हिंदुस्तान का अहम फैसला था, हम अब इस मामले को आगे नहीं बढ़ाएंगे। जितना मेरा मकसद था, उतना मैंने किया। कोर्ट ने जो फैसला कर दिया उसे मान लो। हम पक्षकार थे और हम अब पुनर्विचार याचिका करने आगे नहीं जाएंगे। पक्षकार ज्यादा हैं। कोई क्या कर रहा है, नहीं मालूम।

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