लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों की मौत के आकड़े न होने की जानकारी देने वाली मोदी सरकार ने अब कहा कि 1 करोड़ से ज्यादा प्रवासी मजदूर लॉकडाउन में पैदल अपने घरों को लौटे थे।

सड़क परिवहन राज्यमंत्री वीके सिंह ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि कोरोनावायरस की वजह से बड़ी संख्या में प्रवासियों का पलायन अपने घरों की ओर हुआ। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने अब तक जो डेटा इकट्ठा किया है, उसके मुताबिक, करीब 1.06 करोड़ प्रवासी मजदूर लॉकडाउन के दौरान पैदल ही अपने घरों को निकलने के लिए मजबूर हुए।

उन्होने बताया कि मार्च-जून 2020 की अवधि में सड़कों पर 81,385 हादसे हुए हैं। इनमें 29 हजार 415 लोगों की मौत हुई। हालांकि, उन्होंने साफ कर दिया कि मंत्रालय लॉकडाउन के दौरान सड़क हादसे में मारे गए प्रवासी मजदूरों का अलग से डेटा नहीं रखता।

उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय (एमएचए) ने राज्य / केंद्र शासित प्रदेशों को नियमित सलाह जारी की है कि वे आश्रितों को भोजन, पानी, स्वास्थ्य सुविधाएं और उचित परामर्श प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक उपाय करें। मंत्री ने कहा, “इस मंत्रालय ने देश भर के विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों पर पैदल चलने वाले प्रवासी मजदूरों को भोजन, पीने का पानी, बुनियादी दवाइयाँ और जूते चप्पल पहनने की सुविधा आदि प्रदान करने में मदद की थी।”

उन्होंने कहा कि उन्हें आराम करने के लिए आराम करने वाले स्थानों के साथ स्थानीय प्रशासन की मदद से परिवहन की व्यवस्था के संदर्भ में भी प्रदान किया गया था, ताकि वे अपने गंतव्यों के निकटतम स्थानों पर जा सकें।  इसके अलावा कई जगहों पर स्थानीय प्रशासन ने उन्हें घर पहुंचाने में सहायता की। गृह मंत्रालय के 29 अप्रैल 2020 और 1 मई 2020 के आदेश के बाद प्रवासी मजदूरों को उनके घर ले जाने के लिए बसों और श्रमिक स्पेशल ट्रेनों की भी व्यवस्था की गई।

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