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नई दिल्ली: जस्टिस मार्कंडे काटजू जो सोशल मीडिया पर अपने साहसी विचार व्यक्त करने के लिए पहचाने जाते हैं, ने इस बार हिंदुओं के सबसे बड़े ‘भगवान’ के बारे में एक बड़ा दावा किया है।

उन्होने अपनी हालिया पोस्ट में लिखा कि ‘राम वाल्मीकि द्वारा संस्कृत में लिखी गई मूल रामायण में एक देवता नहीं है। वह केवल राजकुमार है लेकिन कोई भगवान नहीं है। वह 2000 साल बाद तुलसीदास के रामचरितमानों में एक देवता बन गए।

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उन्होंने कहा, ‘मैं रामायणों पर अन्य भाषाओं में टिप्पणी नहीं कर सकता हूं। मैंने उन्हें नहीं पढ़ा है। क्या कुछ तमिलियन कृपया मुझे कंबार रामायण के बारे में बताएंगे? क्या राम वहां एक देवता है या केवल राजकुमार या राजा है? ‘। काटजू जो भारत की प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष भी थे, सोशल मीडिया में तीखे बयान के लिए जाने जाते हैं।

बता दें कि इससे पहले जस्टिस काटजू ने यूपी की योगी सरकार के हालिया इलाहाबाद का नाम बदलने कि तीखी आलोचना की थी। उन्होने मुस्लिम शहरों के लिस्टों की सूची शेयर कर सभी के नाम बदलने की चुनौती दी थी।

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