हज नाम है उस धार्मिक रीति रिवाज़ का जिसमे एक हाजी पीछे दुनिया की दौलत छोड़कर ईश्वर के दरबार में हाजिरी देता है, हज करने के पीछे असल मकसद होता है इस्लाम की उस शिक्षा का जिसे ‘समर्पण’ करना कहते हैं. समर्पण करने के लिए लोभ,ईर्ष्या जैसे नफ्सो को मारकर खुद को एक नए रूप में ढालना होता है इसीलिए हाजी लोग कफ़न जैसा सफ़ेद कपड़ा पहनते है, फिर कैसा दौलत का लालच और हसरत.

इसी बात को साबित किया मिस्त्र के नागरिक मोहम्मद करीम ने, जो खुद में एक उदहारण बनकर सामने आये. मोहम्मद करीम मिस्त्र के नागरिक है जो सऊदी अरब में हज के लिए आए थे। हज के सभी अरकान पुरे करने के उद्देश से वह जामरात के पास गये। वह वहां कंकड़ के लिए पत्थर देख रहे थे की उनकी नज़र अचानक एक बैग पर पढ़ी। बैग कैश और गहनों से भरा हुआ था।

जब उन्होंने उसे खोलकर देखा, तो इसमें एक आईडी कार्ड मिला। आईडी कार्ड नाइजीरियाई महिला का था. उन्होंने उस बैग के मालिक को बहुत ढूंढा लेकिन वह नहीं मिल सका। इसलिए वह अधिकारियों के पास गये और बैग उन्हें सौंप दिया। अब्दुल करीम राजा सलमान द्वारा आयोजित हज और उमराह के कार्यक्रम के तरफ से आए थे।

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उन्होंने कार्यक्रम के अधिकारियों को बैग सौंप दिया। उन्हें अपने बेटे की वजह से इस कार्यक्रम के लिए चुना गया था, जो मिस्र में एक पुलिस अधिकारी थे, जिनकी किसी कारण मौत हो गयी थी। अब्दुलकरीम राजा के मेहमान थे और कार्यक्रम अधिकारियों ने उन्हें एक महान नैतिकता वाले आदमी के रूप में माना।

News Source – World News Arabia

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