देख लो भई .. घरो में जाने की आउट है, जो मारेगा वही लेकर आएगा ,.. तेज़ डाली तो नो बाल

व्योमकेश बक्शी,चाचा चौधरी,साबु,बिल्लू पिंकी,कैरम,मारियो,कॉनट्रा गेम.. नागराज …ये वो चीजें थी जो हमारे बचपन में किसी दौलत से कम कीमती नही थी, वो ज़माना था जब गली मोहल्ले के बच्चे इकट्ठे होकर खेलते थे ..ना मोबाइल थे ना लैपटॉप.. ना फेसबुक .. वैसे कहने के लिए तो बहुत कुछ है लेकिन फिलहाल कुछ फोटो लेकर आये है ..उम्मीद है आपको पसंद आएंगे और बचपन की कुछ यादें ताज़ा हो जाएँगी….

नोट – वैसे फोटो देखते देखते आप गुलाम अली की ग़ज़ल भी गुनगुना सकते है ” ये दौलत भी ले लो .. ये शोहरत भी ले लो .. भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी …मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन ..वो कागज़ की कश्ती ..वो बारिश का पानी ..”

 

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