teesta sitalwad

 

अमित शाह और ऐसे ही लोग अगर चलकर कभी गुजरात दंगों के कारण जेल गए, तो तीस्ता सीतलवाड को शुक्रिया कहिएगा. संविधान और कानून की हिफाजत के लिए वे सारे खतरे उठा रही हैं. केस नतीजे तक पहुंचे, इसके लिए वे जुटी हैं.

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अखिलेश यादव जी से भी एक निवेदन है. पिछले दिनों तीस्ता और मैं लखनऊ लिटरेचर फेस्टिवल में हिस्सा लेने लखनऊ गए थे. तीस्ता की सरकारी गेस्ट हाउस में बुकिंग थी. वहां अफसरों ने बताया कि हाई लेवल से बुकिंग कैंसिल कर दी गई है. इसके बाद तीस्ता को जिन बड़े होटलों में ठहराने की कोशिश की गई, सबने नाम सुनते ही कहा कि किसी बड़े साहब ने मना किया है.

तीस्ता को जान पर खतरे की वजह से सुप्रीम कोर्ट से सुरक्षा मिली हुई है. साथ में गार्ड चलते हैं. उन्हें सुरक्षित जगह पर रहना पड़ता है. लेकिन उस दिन उन्हें जोखिम उठाकर एक सामान्य होटल में ठहरना पड़ा.

तीस्ता सुरक्षा की हाई कैटेगरी में हैं. उनकी मूवमेंट राज्य सरकार और लोकल पुलिस के संज्ञान में होती है. राज्य सरकार आसानी से जांच करा सकती है.

यूपी में वह कौन बड़ा साहेब है, जो नहीं चाहता था कि तीस्ता सीतलवाड लखनऊ में रहें?

दिलीप मंडल की फेसबुक वाल से 

 

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