Saturday, September 25, 2021

 

 

 

हैदराबाद की सईदा फलक मार्शल आर्ट और सेल्फ डिफेंस की ’गोल्डन गर्ल’

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मोहम्मद अकरम/हैदराबाद

दक्कन की सरजमीं हैदराबाद ने अपनी कोख से हमेशा कुछ लोगों को जन्म दिया है, उन्होंने आगे चलकर देश का नाम विश्व स्तर पर रोशन किया है. ऐसी शख्सियतों में एक हैं इस्लामी रहन-सहन के साथ कम उम्र में मार्शल आर्ट और सेल्फ डिफेंस के मैदान में उतरने वाली ’गोल्डन गर्ल’ से मशहूर सईदा फलक. वह पुराने शहर मदीना बिल्डिंग की में रहती हैं.

फलक सईदा ने 2016 में एशियाई चैंपियनशिप जीत कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य और देश का नाम रोशन किया. एशियन चैंपियनशिप, वर्ल्ड चैंपियनशिप, यूएस ओपेन, पीरियम लिंग जैसी दर्जनों प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले कर वह मुकाम हासिल कर चुकी है.

इसके साथ दुनिया के सामने साबित किया है कि एक मुस्लिम परिवार की लड़की इस्लामी संस्कारों, पहनावे के साथ भी कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ सकती हंै. वर्ष 2015 में तेलंगाना सरकार ‘तेलंगाना फाउंडेशन डे’ पर उन्हें विश्व स्तर पर राज्य का नाम रोशन करने पर 50 लाख रुपये का चेक देकर सम्मानित कर चुकी हैं.

इन दिनों वह स्कूल में समाज की सभी वर्ग के बच्चों को सेल्फ डिफेंस की कला सिखा रही हैं. वह बताती हैं, ‘‘जब मैं स्कूल की 7 वीं क्लास में थी, तब शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए अकेले मैदान में जाने लगीं.

धीरे-धीरे उनकी दिलचस्पी कराटे के प्रति बढ़ने लगी. अब हालात बदल गए हैं. इस समय वह खुद कई स्कूलों के करीब 18 हजार छात्र और छात्राओं को सेल्फ डिफेंस और कराटे सिखा रही हैं. कराटे सीखने वाली लड़कियों में से डर, भय खत्म हो रहा है. फिलहाल कोरोना के कराटे सिखाने का काम बंद है. स्कूल पूरी तरह खुलते ही दोबारा यह काम शुरू कर दूंगी.’’

एक प्रश्न के जवाब में वह कहती हैं , ‘‘हमंे इस काम में घर वालों का पूरा समर्थन मिल रहा. वह हौसला बढ़ाते हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘चाहें तो मुस्लिम लड़कियां पूरे ड्रेस में कराटे और सेल्फ डिफेंस सीख सकतीहैं. बहुत लोगों को गलतफहमी है कि मुस्लिम लड़कियों को खेल मैदान में आने से उनके अभिभावक रोकते हैं. ऐसा नहीं है.’’

उन्होंने बताया कि 2016 में जब कराटे प्रतियोगिता में लड़कियों का खिताब अपने नाम किया, तो उन्हें देखकर कई लड़कियां कराटे सीखे आगे आईं. आज इनकी तादाद हजारों में है.

आगे कहती हैं कि वह धर्म से ऊपर उठ कर समाज के सभी वर्गों की लड़कियों को कराटे सीखाती हैं, ताकि आत्मरक्षा कर सकें. सरकार को चाहिए कि वह सभी स्कूलों में सेल्फ डिफेंस, कराटे सिखाने के लिए क्लास रखे. अभी पीटी क्लास होती है. इसकी जगह या इसके बाद, कराटे सिखाने की व्यवस्था होनी चाहिए. इस से लड़कियांे में आत्मरक्षा के गुर सीखने की भावना बढ़ेगी.

मेरा ख्वाब है कि मैं देश का नाम रोशन करुं और लड़के, लड़कियों को सिखाऊं जिससे वह अपनी रक्षा स्वयं कर सके. उल्लेखनीय है कि कराटे पूरी दुनिया का पसंदीदा खेल बन चुका है. यह खेल के साथ आत्मरक्षा का भी बेहद सधा माध्यम है.  1882 की शुरुआत में इसकी शुरुआत जापान में हुई थी. उसके बाद यह खेल पूरी दुनियां में प्रसिद्ध हो गया. यह जहां एक तरह का खेल है, वहीं इसे लोग आत्मरक्षा के लिए भी सीखने लगे हैं.

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