पिछले काफी दिनों से evm को लेकर उठापटक का दौर जारी है, जहाँ एक तरफ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने evm पर सवालिया निशान लगाते हुए मोर्चा खोल लिया है वहीँ अन्य पार्टियाँ भी अब खुलकर बोलने लगी है. मामला को हवा तब मिली जब भिंड में कोई भी बटन दबाने से कमल की पर्ची निकली.

चुनाव आयोग ऐसी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें खरीदने को तैयार है जो इनके साथ छेड़छाड़ की कोशिश होने पर काम करना बंद कर देंगी। यह कदम एक ऐसे समय पर उठाया जा रहा है जब कई दल हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में ईवीएम के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगा चुके हैं। एम-3 प्रकार की ईवीएम में मशीनों की यथार्थता के प्रमाणन के लिए एक सेल्फ डायग्नोस्टिक सिस्टम लगा है।

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ये मशीनें एक आपसी प्रमाणन प्रणाली के साथ आएंगी। सिर्फ एक सही ईवीएम ही क्षेत्र की अन्य ईवीएम के साथ संवाद कर सकती है। इसका निमार्ण परमाणु ऊर्जा पीएसयू ईसीआईएल या रक्षा क्षेत्र की पीएसयू बीईएल द्वारा हुआ होना चाहिए। किसी भी अन्य कंपनी द्वारा बनाई गई ईवीएम अन्य मशीनों से संवाद नहीं कर पाएगी। इस तरह गलत मशीन का पदार्फाश हो जाएगा।

इसी बीच चुनाव आयोग के कहना है की मशीन इसलिए बदली जा रही है क्योंकी इनका जीवनकाल (15 वर्ष) खत्म हो रहा है, गौरतलब है की वर्तमान में इस्तेमाल हो रही evm मशीनें 2006 में खरीदीं गयी थी लेकिन अगर हिसाब लगाया जाए तो 2021 में इनका जीवन काल समाप्त होगा लेकिन आननं फानन में नयी मशीनें खरीदने का निर्णय लेना भी प्रश्न चिन्ह लगा रहा है, जब की खुद इलेक्शन कमीशन का कहना है की evm मचिन पूरी तरह सुरक्षित है इसमें छेड़छाड़ की कतई गुंजाइश नही है

ये मशीनें वर्ष 2018 में यानी अगले लोकसभा चुनाव से एक साल पहले आ सकती हैं। आयोग ने वर्ष 2006 से पहले खरीदी गई 9,30,430 ईवीएम को बदलने का फैसला किया है क्योंकि पुरानी मशीनों का 15 साल का जीवनकाल पूरा हो चुका है।

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