कूड़े के ढेर में पड़ी बिलबिला रही थी नवजात, पत्रकार ने नयी ज़िन्दगी देकर खुद अपनाया

10:51 pm Published by:-Hindi News

इंसानियत ज़िंदा है, लेकिन हैवान को मौत कब आएगी?

एक नवजात बच्ची जो या तो इस वजह से कूड़े के ढेर में फेंक दी गई क्योंकि वह ‘लाडली’ थी ‘लाडला’ नही, या फिर इस वजह से कि वह ऐय्याशी का नतीजा रही होगी? लेकिन इस सबमें बच्ची का क्या कसूर था ? उसे तो जीने का हक़ देना चाहिए था, कैसे निर्मम हैं वे कलेजे जो नवजात को भी बख्शते और उन्हें कूड़े के ढ़ेर में फेंक देते हैं? क्या उनके सीने मे दिल नही होता होगा? जिस बच्ची की आप चीखें सुन रहे हैं(विडियो)

यह बच्ची राजस्थान के नागौर के बरनेल में कचरे ढेर में मिली, बच्ची को इस हालत में देख उसका इलाज नागौर के जेएलएन अस्पताल में किया हो रहा है, डॉक्टर्स की टीम लगी हुई है, किसी सज्जन ने इस बच्ची का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया, यह वीडियो एक पत्रकार पति पत्नि Sakshi Joshi और Vinod Kapri सर ने देखा, उनसे इस बच्ची की चीखें सुनी नही गईं, उन्होंने इस बच्ची को अपना नाम देने का फैसला लिया। Vinod Kapri ने ट्वीट करते हुए जो खुशी बयां की है वह बिल्कुल वैसी ही है जैसे किसी घर में ‘नया मेहमान’ आने की होती है।

उन्होंने इस मासूम को ‘पीहू’ नाम देते हुए कहा कि ‘मुझे नहीं लगता कि 14जून से बड़ा दिन जीवन में कभी आया है या कभी आएगा- जब सिर्फ ये एहसास भर है कि घर में ये प्यारी बच्ची आने वाली है। हमें एहसास है कि देश में गोद लेने की प्रकिया जटिल और लंबी है।पर उम्मीद है कि आप लोगों की दुआओं और प्यार हर मुश्किल को पार करेगा और ये बिटिया घर आएगी’।

यह मासूम खुशकिस्मत है कि इसे विनोद और साक्षी जैसे माता पिता मिल गए, लेकिन ऐसी न जाने कितनी मासूम हैं जो यूं ही कूड़े के ढेर में तड़प तड़प कर दम तोड़ देतीं हैं। विनोद और साक्षी जैसे इंसानों की शक्ल में इंसानियत तो अभी ज़िंदा है, लेकिन सवाल यह है कि वे हैवान कब मरेंगे जो इन मासूमों पर ज़ुल्म करते आ रहे हैं? उर्दू शायर मुनव्वर राणा ने भी ऐसे हैवानों की तरफ इशारा करते हुए क्या ख़ूब कहा है-
फिर किसी ने ‘लक्ष्मी देवी’ को ठोकर मार दी
आज कूड़ेदान में फिर एक बच्ची मिल गई।

अल्लाह से दुआ है कि वह इस मासूम और इसके मां बाप (साक्षी, विनोद) को सलामत रखे, और इस दुनिया को, इस समाज को, हैवानों से महफूज़ रखे- आमीन

वसीम अकरम त्यागी की फेसबुक वाल से

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