Saturday, June 25, 2022

लोग मिलते हैं सवालों की तरह

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लोग मिलते हैं सवालों की तरह
जैसे बिन चाबी के तालों की तरह

भूख में लम्हात को खाया गया
सख्त रोटी के निवालों की तरह

घर अगर घर ही रहें तो ठीक है
क्यों बनाते हो शिवालों की तरह

दीप सा किरदार तो पैदा करो
लोग चाहेंगे उजालों की तरह

ख़ुद को तुम इन्सान तो साबित करो
याद आओगे मिसालों की तरह

दीपक गुप्ता

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