जाकिर नाईक ने विवादित भाषण के लिए मांगी माफी, मलेशिया में भाषण देने पर फिर भी रोक

11:51 am Published by:-Hindi News

सलाफ़ी स्कॉलर जाकिर नाईक ने अपने विवादित बयान के लिए माफी मांग ली है।  जाकिर ने अपने बयान में कहा, ‘मैं हमेशा से शांति का समर्थक रहा हूं, यही कुरान का मतलब है. पूरी दुनिया में शांति फैलाना मेरा मिशन रहा है। दुर्भाग्य से मेरे आलोचक, मेरे इस मिशन को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। आपने पिछले कुछ दिनों में देखा होगा कि मुझ पर देश में धार्मिक नस्लीय जहर फैलाने के आरोप लगाए जा रहे हैं और मेरे आलोचक कुछ सिलेक्टिव बातों को उठा रहे हैं। आज मैंने पुलिस के सामने अपना पक्ष रखा है।”

जाकिर ने कहा, “मैं इस बात से भी दुखी हूं कि इस पूरे प्रकरण से गैर-मुस्लिम लोग मुझे रेसिस्ट समझ रहे हैं। मुझे भी इस बात की चिंता है क्योंकि बिना संदर्भ की बातों से मेरे धार्मिक उपदेश न सुनने वाला भी दुखी है। नस्लीयता एक बुराई है, मैं इसके खिलाफ हूं। कुरान में भी यही कहा गया है।” मोहम्मद साहब ने अपनी अंतिम धार्मिक यात्रा के दौरान कहा था, “कोई भी अरबवासी, गैर-अरब लोगों से श्रेष्ठ नहीं है, न ही गैर-अरब के लोग, अरब के लोगों से श्रेष्ठ हैं। श्वेत, अश्वेत से श्रेष्ठ नहीं है, ठीक इसी तरह अश्वेत, श्वेत से श्रेष्ठ नहीं है।”

जाकिर ने अपने बयान में आगे कहा, “हालांकि मैंने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है फिर भी मैं इस गफलत के लिए लोगों से माफी मांगता हूं। मैं नहीं चाहता कि कोई भी मेरे खिलाफ गलत भावनाएं रखे। किसी व्यक्ति या समुदाय को नाराज करना मेरा कभी भी उद्देश्य नहीं रहा।”

3 अगस्त को कोटा बारू में नाइक ने हिंदुओं और चीनियों को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करते हुए कहा था कि भारत में मुस्लिमों की तुलना में हिंदुओं के पास 100 गुना ज्यादा अधिकार हैं, जो यहां अल्पसंख्यक श्रेणी में आते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि मलेशिया के हिंदू पीएम नरेंद्र मोदी का समर्थन करते हैं, मलेशिया के पीएम महाथिर मोहम्मद का नहीं। उन्होंने मलेशिया में जातीय चीनियों को भी बार-बार देश छोड़कर जाने को कहा था।

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