संयुक्त राष्ट्र संघ ने अपनी एक रिपोर्ट में यमन में भयानक मानवीय स्थिति की ओर संकेत करते हुए कहा है कि इस देश के डेढ़ करोड़ लोग पीने के स्वच्छ पानी से वंचित हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवीय मामलों के समन्वयक कार्यालय ने अपनी रिपोर्ट में इसी तरह बताया है कि एक करोड़ चालीस लाख से अधिक यमनवासी उचित स्वास्थ्य संभावनाओं से भी वंचित हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस देश पर पिछले लगभग तीन साल से जारी हमलों के कारण गंदे पानी की निकासी का सिस्टम पूरी तरह तबाह हो चुका है जिसके चलते लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।
राष्ट्र संघ की रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चे और वृद्ध, यमन में हैज़े की बीमारी से सबसे ज़्यादा ख़तरे में हैं। बताया जाता है कि इस संक्रामक रोग से अब तक यमन में लगभग 2000 लोग मारे जा चुके हैं जबकि लगभग पांच लाख लोग इस बीमारी में ग्रस्त हैं।
संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवीय मामलों के समन्वयक कार्यालय की रिपोर्ट में बताया गया है कि हैज़े की बीमारी से 30 प्रतिशत वृद्ध और 25 प्रतिशत बच्चे मारे गए हैं जबकि कुल रोगियों में 41 प्रतिशत बच्चे हैं।
संयुक्त राष्ट्र संघ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यमन के 60 प्रतिशत लोगों को खाद्य असुरक्षा का सामना है जबकि सत्तर लाख लोग बुरी तरह से खाने-पीने की वस्तुओं की कमी से जूझ रहे हैं और बीस लाख से अधिक बच्चे कुपोषण में ग्रस्त हैं।
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