रोहिंग्या मुस्लिमों पर हिंसा को लेकर म्यांमार की दुनिया भर में आलोचना हो रही है. सयुंक्त राष्ट्र के साथ-साथ विश्व की महाशक्तियों ने भी म्यांमार पर इस मामले में उंगलिया तानी हुई है.

ऐसे में सोमवार को संयुक्त राष्ट्र में म्यांमार के दूत ने सफाई पेश करते हुए कहा कि उनके देश में मुसलमानों का ‘जातीय सफाया’ या नरसंहार नहीं हुआ है. साथ ही उन्होंने इन शब्दों के इस्तेमाल पर आपत्ति भी जताई है.

संयुक्त राष्ट्र में म्यांमार के दूत हाऊ डो सुआन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा कि इस अधिवेशन के दौरान विभिन्न देशों के नेताओं ने  गैर जिम्मेदाराना टिप्पणियां की.

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ‘‘वहां कोई जातीय सफाया नहीं हुआ है. कोई नरसंहार नहीं हुआ है. लंबे समय तक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले म्यांमार के नेता ऐसी नीतियों का समर्थन नहीं करेंगे.  हम जातीय सफाए और नरसंहार को रोकने के लिए सबकुछ करेंगे.’’

ध्यान रहे कि सयुंक्त राष्ट्र महासचिव अंटोनियो गुटरेस ने  रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ सैन्य अभियान को जातीय नरसंहार का नाम देते हुए इसे रोके जाने को लेकर म्यांमार को आखिरी मौका दिया था.

उन्होंने रखाइन मुद्दे को ‘‘अत्यंत जटिल’’ बताते हुए सदस्य देशों से अनुरोध किया कि वे उत्तरी रखाइन में हालात को तटस्थ भाव से और निष्पक्ष ढंग से देखे.

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