saudi women

सद्भावना के प्रचार के लिए समिति और मक्का में उपाध्यक्ष निवारक शेख अहमद अल-गमदी का बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने ने कहा कि अबाया (काले रंग की पोशाक) पहनना इस्लाम की शिक्षाओं के अनुरूप है.

उन्होंने बताया कि काला रंग सिर्फ इस्लामी कानून की अनुमति नहीं है, लेकिन यह “अल साहवा” समूह द्वारा कुछ फतवाओं के शोषण और सिर ढकने और काले रंग की लम्बे-ढीले पोशाक को बढ़ावा देने की वजह से हुआ सऊदी महिलाओं के लिए असल पोशाक हिजाब है.

हिजाब पहनना है ज़रूरी 

अल अरेबिया के मुताबिक, अल-गमदी ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि, महिलाओं को शालीन कपडे पहने चाहए. इसका मतलब यह नहीं है कि वह अबाया ही हो.

source: Al Arabiya

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मौलाना ने आगे कहा कि, “महिलाओं को वह पोशाक पहनने में कुछ भी गलत नहीं है, अगर यह एक काले कपड़े नहीं है, तो इन पोशाक अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन सभी पोशाकों में तन ढका होना चाहए.

ज़रूरी नहीं के काले रंग की ही हो पोशाक  

मौलाना ने कहा कि, अबाया का रंग और इसकी डिजाइन इस्लाम की शिक्षाओं पर आधारित नहीं है, लेकिन मुख्य उद्देश्य बदल को ढकना और शालीन कपड़े पहनना है, “अलग तरह या रंग के कपड़े पहनने में कुछ भी गलत नहीं है.”

उन्होंने यह भी कहा कि काला आबया उस्मानिया युग के आखिर में बनाया गया, लेकिन कुछ हदीसों और कथन में यह उल्लेख किया गया था कि “पैगंबर साहब की पत्नियां पीले और गुलाब जैसे रंग की पोशाक पहनती थी.

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