mehmoud abbas

पिछले साल के आखिरी महीने में ट्रम्प ने एक विवादित फैसला लिया था की वह इजराइल की राजधानी के रूप में जेरुसलम को मान्यता देंगे और अपनी यूएस एम्बेसी जो की वर्तमान में तेल अवीव में स्थित है,को जेरुसलम में स्थान्तरित करेंगे. इस फैसले के बाद सभी फिलिस्तीनियों ने जगह-जगह विरोध किया क्योंकि वह जेरुसलम को अपनी भावी राजधानी के रूप में देखते हैं. इस विवादित फैसले के बाद जगह-जगह ट्रम्प और नेतान्याहू- इजराइल के पीएम- की निंदा की गयी. जगह-जगह दोनों के नाम के झंडे जलाये गए.

ट्रम्प के फैसले के खिलाफ लड़ाई जारी 

मिडिल ईस्ट मॉनिटर की खबरों के अनुसार फिलिस्तीन के राष्ट्रपति अब्बास ने ट्रम्प के जेरुसलम कदम पर ट्रम्प के निर्णय के खिलाफ लड़ाई जारी करने का वादा किया है.

फिलिस्तीनी अधिकारिक न्यूज एजेंसी डब्लूएएफए के अनुसार रामल्लाह के वेस्ट बैंक में एक मीटिंग के दौरान अब्बास ने कहा की “फिलिस्तीनी प्रशासन यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प या किसी भी अन्य को इजराइल की राजधानी के रूप में जेरुसलम को मान्यता नहीं देने देगा.”

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किसी भी देश को अपनी एम्बेसी जेरुसलम में स्थान्तरित करने नहीं देगा

अब्बास ने कहा की “फिलिस्तीनी सरकार ट्रम्प के जेरुसलम कदम के खिलाफ अपनी लड़ाई को जारी रखेगा और जब तक इजराइल-फिलिस्तीनी मुद्दे का हल नहीं निकल जाता तब तक अमेरिका या किसी भी देश को अपनी एम्बेसी जेरुसलम में स्थान्तरित करने नहीं देगा.”

दोनों देशों के समाधान पर जोर देते हुए अब्बास ने कहा की “पूर्वी जेरुसलम सभी धर्मों का धार्मिक स्थान है, इस्लाम,इसाई और यहूदियों. धार्मिक लोग यहाँ आ सकते हैं और अपने धार्मिक महत्वों का पालन कर सकते हैं. उन्होंने कहा की “हम हमेशा कहते हैं ईस्ट जेरुसलम हमारे देश की राजधानी है और यह सभी धर्मों के लिए खुली है.”

मिडिल ईस्ट मॉनिटर के अनुसार अब्बास ने अरबियों और मुस्लिमों को कब्जाए गए क्षेत्र, विशेषकर जेरुसलम में जाने के लिए कहा.6 दिसंबर 2017 को, ट्रम्प ने जेरूसलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता देने की घोषणा की, जिसका फिलीस्तीनी क्षेत्रों में निंदा और क्रोधित विरोध प्रदर्शन किया गया.

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