(FILES) In this photograph taken on January 11, 2013, Afghan President Hamid Karzai answers a question during a joint press conference with US President Barack Obama in the East Room at the White House in Washington, DC. Afghan President Hamid Karzai on April 29, 2013 confirmed that his government received money from US intelligence agency the CIA, following reports of cash being handed over in suitcases and backpacks.AFP PHOTO/Jewel Samad/FILES
(FILES) In this photograph taken on January 11, 2013, Afghan President Hamid Karzai answers a question during a joint press conference with US President Barack Obama in the East Room at the White House in Washington, DC. Afghan President Hamid Karzai on April 29, 2013 confirmed that his government received money from US intelligence agency the CIA, following reports of cash being handed over in suitcases and backpacks.AFP PHOTO/Jewel Samad/FILES

अफग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने देश में खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस की मोजुदगी को लेकर अमेरिका को जिम्मेदार बताया हैं.

करज़ई ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद विदेशी सैनिकों का नेतृत्व अमरीका के हाथ में हैं. विदेशी सैनिकों का नेतृत्व संभालने के बावजूद अमरीका ने पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के रास्ते दाइश आईएस को अफ़ग़ानिस्तान में घुूसने दिया. उन्होंने कहा कि इस रस्ते से आईएस ने अफ़ग़ानिस्तान में प्रवेश किया और उन्होंने अपने अड्डे बनाए.

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के लोगों का कहना है कि पिछले दो वर्षों से अंजान लोग पाकिस्तान की सीमा से इस क्षेत्र में आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस बात की शिकायत भी की गई किंतु उसपर कोई ध्यान नहीं दिया गया.

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करज़ई ने कहा कि पिछले दो वर्षों के दौरान आतंकवादी गुट आईएस के बहुत से सदस्य अफ़ग़ानिस्तान में आए जिन्हें रोकने का कोई प्रयास नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि आईएस के विरुद्ध संघर्ष में अमरीका बिल्कुल ही गंभीर नहीं है.

गौरतलब रहे कि अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने अमरीका द्वारा देश में दस हज़ार किलोग्राम के बम का आईएस के बहाने परीक्षण किये जाने को लेकर मौर्चा खोला हुआ हैं. उनका कहना हैं कि अमरीका की ओर से देश पर 10 हज़ार किलोग्राम के बम का हमला जहां पर अफ़ग़ान राष्ट्र का अनादर है वहीं पर इसके दुष्प्रभाव वर्षों तक अफ़ग़ानी जनता को भुगतने पड़ेंगे.

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