नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के लागू होने के बाद आंखों में ख्वाबों को सजाए हुए पाकिस्तान के हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय के कम से कम से 14 लोगों को टूटे हुए सपनों के साथ वापस अपने मुल्क लौटना पड़ा है। अब उनका कहना है कि पड़ोसी देश में बेहतर आर्थिक संभावनाओं के उनके सपने चकनाचूर हो गए हैं।

वाघा बॉर्डर क्रॉसिंग पर पत्रकारों से बात करते हुए, कन्हैया लाल और नानक राम, परिवारों के प्रमुखों ने कहा कि वे बेहतर आर्थिक संभावनाओं की उम्मीद में भारत गए थे, लेकिन यह एक “तमाशा” था और उन्हें बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

भारत ने हाल ही में सीएए कानून पारित किया, जिसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के हिंदुओं, सिखों, पारसियों, जैनियों और ईसाइयों को फास्ट-ट्रैक नागरिकता के लिए आवेदन करने की अनुमति दी गई। पिछले महीने, भारत के राजस्थान राज्य के जोधपुर शहर में किराए के फार्महाउस में 11 पाकिस्तानी हिंदुओं का एक परिवार मृत पाया गया था।

लाल ने अनादोलु एजेंसी को बताया, “मैं जानता था कि परिवार, और उनमें से अधिकांश शिक्षित थे। लेकिन भारत में किसी भी बाहरी व्यक्ति के लिए कोई अवसर नहीं हैं। तथ्य यह है कि वे दयनीय परिस्थितियों में रह रहे थे और अत्यधिक गरीबी से पीड़ित थे और उनके जीवन के लिए खतरनाक खतरे थे।” उन्होंने कहा कि 28,000 से अधिक पाकिस्तानी हिंदू घर लौटने के इंतजार में जोधपुर में फंसे हुए हैं।

बता दें कि सीएए के तहत उन लोगों को नागरिकता दी जानी है, जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए हैं। इसके अलावा भारतीय नागरिकता हासिल करने के लिए कम से कम उन्‍हें 6 साल भारत में बिताना भी जरुरी हैं। नागरिकता कानून में संशोधन से पूर्व यह अवधि 11 वर्षों की थी लेकिन नागरिकता संशोधन कानून के तहत यह समय सीमा घटाकर 6 साल कर दी गयी है।

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