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आतंकवादी गुट दाइश के प्रकट होने के बाद इराक़ के हालात पर नज़र डालने से पता चलता है कि स्वयं सेवी बलों ने दाइश से संघर्ष और देश के उत्तरी भाग में कुर्द अलगावादियों से संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।

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वास्तव में स्वयं सेवी बलों के संघर्ष का यह परिणाम निकला कि दाइश के अतिग्रहण में गये क्षेत्र एक बार फिर सरकार के नियंत्रण में आ गये। इसी प्रकार कुर्दिस्तान क्षेत्र के हालिया परिवर्तन और विवादित क्षेत्रों को वापस लेने की कार्यवाही करके इराक़ के विभाजन के ख़तर को ख़त्म कर दिया और एकजुट इराक़ को सुनिश्चित बना दिया।

यह ऐसी हालत में है कि इराक़ी जनता और सरकार के लिए स्वयं सेवी बलों की सफलता के बाद अमरीका इस गुट को कमज़ोर करने के प्रयास में है। वाशिंग्टन ने हाल ही में विदेशमंत्री को इराक़ भेजा ताकि वह स्वयं सेवी संगठनों को भंग करने के लिए एबादी सरकार पर दबाव डाल सकें।

अमरीका और उसके क्षेत्रीय घटक अफ़वाहें फैलाकर और निराधार बयानबाज़ी से इराक़ के स्वयं सेवी बलों के विरुद्ध प्रोपेगैंडा करने और इराक़ में इस गुट की मुख्य भूमिका और इसकी सफलताओं से लोगों का ध्यान हटाने का प्रयास कर रहे हैं।

उदाहरण स्वरूप 23 अक्तूबर के रेक्स टिलरसन के बयान की ओर संकेत किया जा सकता है जिसमें उन्होंने बहुत सख़्त लहजे में यह कहा कि स्वयं सेवी बलों को अब अपने घरों को लौट जाना चाहिए क्योंकि यह लोग इराक़ी सेना को तबाह कर देंगे।

यहीं पर बात समाप्त नहीं होती बल्कि अमरीका से संबंधित संचार माध्यम तो इससे आगे बढ़ गये और उन्होंने स्वयं सेवी बलों के कमान्डर्स को आतंकवादी तक कह डाला। यह ऐसी स्थिति में है कि इराक़ में आतंकवाद से संघर्ष में मुख्य किरदार स्वयं सेवी बल रहे हैं और उसने इराक़ और क्षेत्र में तनाव में वृद्धि की परिधि में अमरीकी योजनाओं से हमेशा संघर्ष किया है।

इसी परिधि में स्वयं सेवी बल नोजबा के महासचिव शैख़ अकरम काबी ने अलमनार टीवी चैनल से बात करते हुए कहा कि हम अमरीका से लड़ने को तैयार हैं। एक ओर अमरीका, इराक़ में लंबे समय तक बने रहने का इरादा बना रहा है जबकि इराक़ में अमरीका की विध्वंसक कार्यवाहियों को देखते हुए अब यहां पर यह सवाल पैदा होता है कि क्या इराक़ी स्वयं सेवी बलों और अमरीका में टकराव हो जाएगा?

इराक़ के वर्तमान संकट और इस देश की तनावपूर्ण स्थिति पर नज़र डालने से यह परिणाम निकाला जा सकता है कि अमरीका की प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष उपस्थिति से देश की सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में कोई मदद नहीं मिल सकी। यह बात पूरी दुनिया को पता है कि अलक़ायदा के गठन और उससे दाइश को अस्तित्व में लाने में अमरीका की भूमिका किसी से छिपी नहीं है ताकि वह इन हालत से अपने क्षेत्रीय और राजनैतिक हित साध सके।

इराक़ को विभाजित करने के लिए अमरीका के दीर्घावधि कार्यक्रम की परिधि में इस देश में दाइश का फ़ितना बोना और इराक़ में दाइश के कमज़ोर होने के बाद अमरीका की उपस्थिति और मध्यपूर्व में होने वाले परिवर्तनों से पता चलता है कि इराक़ी बलों विशेषकर स्वयं सेवी बलों ने दाइश को पराजित करके अमरीकी योजनाओं पर पानी फेर दिया है।

जैसा कि शैख़ अकरम काबी ने अलमनार टीवी चैनल से बात करे हुए कहा कि अमरीका स्वयं सेवी बलों के विरुद्ध प्रोपेगैंडे करने के प्रयास में है। उन्होंने कहा कि अमरीका ने कुछ क़बाईलियों को असद छावनी में ट्रेनिंग दी है और उसके बाद यह लोग स्वयं सेवी बल में शामिल हो गये ताकि वाशिंग्टन के हितों को पूरा कर सकें और स्वयं सेवी बलों पर लगने वाले कुछ आरोप इन्हीं लोगों की ग़लत हरकतों का परिणाम है।

बहरहाल अमरीका और उसके घटक इराक़ में अपने मोहरों के पिट जाने के बाद स्वयं सेवी बलों पर आरोप लगाने और इसको कमज़ोर करने के प्रयास में हैं किन्तु इराक़ के धार्मिक और राजनैतिक नेतृत्व की होशियारी के कारण अब तक विभिन्न षड्यंत्रों को विफल बनाया जा चुका है और भविष्य में भी सारे षड्यंत्र विफल बना दिए जाएंगे।

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