मिस्र की अलअज़हर यूनिवर्सिटी के मुफ़्ती अहमद करीमा ने कहा वहाबी व सलफ़ी लोग सुन्नी मुसलमान नहीं हैं.

ग्रोज़नी में हुयी सुन्नी कॉन्फ़्रेंस में वहाबियों की अनुपस्थिति पर उन्होंने कहा कि  “ग्रोज़नी में अहले सुन्नत वल जमाअत कॉन्फ़्रेंस ने सलफ़ी व वहाबियों को नहीं बुलाया जो ख़ुद को अहले सुन्नत व जमाअत समझते हैं.”

उन्होंने आगे कहा कि वहाबी व सलफ़ी मध्य एशिया में दहशतगर्दी का समर्थन करते हैं और अलक़ाएदा, बोको हराम, दाइश तथा तालेबान जैसे आतंकवादी संगठनों का खुल कर समर्थन करते हैं.

करीमा के अनुसार, वहाबी विचार रखने वालों ने ताजिकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, चेचन्या और क्षेत्र के दूसरे देशों में चरमपंथी व हिंसक विचारों को फैलाने की कोशिश की है.


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