नवंबर महीने में अफ़ग़ानिस्तान के क़ुन्दूज़ प्रांत में अमरीकी सैनिकों ने अफ़ग़ान जनता के घरों पर फ़ायरिंग की थी. इस फ़ायरिंग में 33 बेगुनाह लोग मारे गये थे और 27 घायल हुए थे.

ये हमला 2015 में डॉक्टर्ज़ विदाउट बोर्डर्ज़ के अस्पताल पर किया गया था. इस हमले को अमरीकी सेना ने ऐसी स्थिति में अंजाम दिया था. जब 2014 के अंत में अफ़ग़ानिस्तान में नेटों ने काबुल सरकार को वादा किया था कि अब वे केवल सिर्फ़ अफगान सरकार के अनुरोध पर ही अफ़ग़ान वायु सेना की मदद के लिए हवाई कार्यवाही करेंगे.

आखिर में अब अमरीकी सेना ने इस जनसंहार को अमरीकी सैनिकों की सीधी फ़ायरिंग का परिणाम माना है. इसी वजह से अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका के युद्ध अपराध की बढ़ती घटनाओं के कारण कुछ समय पहले अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सैनिकों के अपराधों की जांच शुरु करने की की बात कही थी.

अगर अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सैनिकों के अपराधों की जांच करने के अपने वादे को पूरा कर दिखाया तो इस बात की प्रबल संभावना है कि अफ़ग़ानिस्तान में विदेशी सैनिकों और ख़ास तौर पर अमरीकी सैनिकों के जघन्य अपराध के और ख़तरनाक आयाम से दुनिया अवगत होगी.


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