वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को ईरान पर और कड़े प्रतिबंध लगाए। अब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खम्नेई और उनकी सेना के आठ शीर्ष सैन्य कमांडर अमेरिका में वित्तीय सुविधाओं का लाभ नहीं ले पाएंगे।

अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ये नए प्रतिबंध अमरीकी ड्रोन पर हुए हमलों और कई अन्य वजहों से लगाए गए हैं। इन प्रतिबंधों का आदेश जारी करने के बाद ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कहा कि प्रतिबंधों के दायरे में अयातुल्लाह ख़मेनेई को शामिल करना बेहद ज़रूरी था।

उन्होंने कहा, ”ईरान के सर्वोच्च नेता ही उनकी सत्ता के दौरान होने वाले सभी कामों के लिए ज़िम्मेदार हैं। उन्हें उनके देश में बहुत सम्मान दिया जाता है। उनके अंतर्गत सबसे खतरनाक चीजें आती हैं, जिसमें इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड्स की सेना भी है। इन प्रतिबंधों के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता, उनका दफ्तर और उनसे ताल्लुक रखने वाले अन्य सभी लोग किसी भी तरह के वित्तीय सहयोग से वंचित हो जाएंगे।”

ट्रम्प ने ट्रेजरी सचिव स्टीवन मेनुचिन की उपस्थिति में प्रतिबंध लगाने वाले कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि हम ईरान को कभी परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे। हमने अब तक इस मामले में काफी संयम दिखाया, लेकिन आगे ईरान पर दबाव बनाए रखेंगे।

वहीं संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत माजिद तख्त रवांची ने सोमवार को कहा कि अमेरिका जब तक ईरान को प्रतिबंधों के दबाव की धमकी देता रहेगा, ईरान उसके साथ वार्ता नहीं करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘हम दबाव के आगे झुकने वाले नहीं है। अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर दबाव डाला है। उसने हम पर और प्रतिबंध लगाए हैं। जब तक उसकी यह रणनीति रहेगी तब तक ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत नहीं हो सकती।”

रवांची ने कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए नए प्रतिबंध पश्चिमी एशियाई देश के प्रति उसकी शत्रुतापूर्ण रवैये को दर्शाता है। अमेरिका का यह फैसला ईरान के लोगों और वहां के नेताओं के प्रति उसकी शत्रुता का प्रतीक है। अमेरिका अंतरराष्ट्रीय कानून-व्यवस्था का सम्मान नहीं करता है।

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