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चीन के शिनजियांग क्षेत्र में अल्पसंख्यक उईगर मुस्लिमों को अवैध रूप से हिरासत रखने के मामले में अमेरिका ने चीन पर प्रतिबंध लगाने का विचार कर लिया है। ट्रंप प्रशासन वरिष्ठ चीनी अधिकारियों और कंपनियों को दंडित करने पर विचार कर रहा है, जो बड़ी संख्या में उइगुर मुसलमानों को डिटेंशन में रखने के लिए जिम्मेदार हैं।

बता दें कि दो सप्ताह पहले अमेरिकी सांसदों ने विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और ट्रेजरी सेक्रटरी स्टीवन नुचिन से सात चीनी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। वही सोमवार को ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि चीन के शिनजियांग क्षेत्र में अल्पसंख्यकों के साथ जिस तरह का सलूक वहां की सरकार कर रही है, उसे देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को देश पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। इस क्षेत्र से करीब 10 लाख लोगों को हिरासत में लिया गया है।

ऐसे में अब अमेरिकी अधिकारी सर्विलांस तकनीक की बिक्री को भी सीमित करने के बारे में सोच रहे हैं, जिसका बड़े पैमाने पर चीनी सुरक्षा एजेंसियां उत्तरपश्चिम चीन में अल्पसंख्यक उइगुरों के खिलाफ इस्तेमाल करती हैं। पश्चिमी चीन में सैकड़ों मुस्लिमों को बदलाव के (ट्रांसफर्मेशन) के नाम पर ट्रेनिंग कैंप में ले जाया जा रहा है। जहां मुस्लिमों को इस्लाम से दूर कर कम्यूनिस्ट बनाने पर ज़ोर दिया जाता है।

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इन क्लास में वैचारिक समझ बनाने के नाम पर मुस्लिमों को अपने ही समुदाय के लिए आलोचनात्मक लेख लिखने के लिए कहा जाता है। अब्दुसलाम मुहमेत (41) ने बताया, पुलिस ने मुझे उस वक्त हिरासत में लिया था, जब मैं कुरान की कुछ आयतें पढ़ रहा था। मैं एक अंतिम संस्कार में शरीक होकर लौट रहा था और इसलिए मैं कुरान की आयतें दोहरा रहा था। मुझे कैंप में ले जाया गया, जहां मेरे साथ 30 और लोग भी थे। हमसे कहा गया कि हम अपनी पुरानी जिंदगी और मान्यताओं को पूरी तरह से भूल जाएं।

उन्होंने कहा, ‘यह ट्रेनिंग कैंप ऐसी जगह नहीं है जहां अतिवादी विचारों को खत्म किया जाए, यह कैंप ऐसी जगह थी जहां जबरन अपनी उइगर पहचान को खत्म करना होता है।’