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संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल ने गुरुवार को घोषणा की कि वे संयुक्त राष्ट्र की वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) से अलग होंगे, वाशिंगटन ने यूनेस्को पर “इजरायल विरोधी” होने का आरोप लगाया.

इजरायल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को कहा कि इजरायल यूनेस्को से बाहर निकलने की तैयारी कर रहा था, कुछ घंटे बाद अमेरिका ने इसी तरह की घोषणा की.

बयान में कहा गया है कि नेतनयाहू ने अपने विदेश मंत्रालय को संगठन छोड़ने की तैयारी शुरू करने के निर्देश दे दिए. कुछ घंटे पहले अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता हीथर नॉर्ट ने कहा कि वॉशिंगटन पेरिस स्थित एजेंसी में अपने प्रतिनिधित्व को बदलने के लिए एक “पर्यवेक्षक मिशन” स्थापित करेगा.

आप को बता दे कि संयुक्त राज्य अमेरिका 2011 से यूनिस्को से नाराज है. जब यूनिस्को सदस्यों ने अपने सहयोगी इजरायल के विरोध के बावजूद, फिलिस्तीन की पूर्ण सदस्यता की सदस्यता प्रदान की. दरअसल वाशिंगटन, संयुक्त राष्ट्र के संगठनों द्वारा फिलीस्तीनियों को एक राज्य के रूप में मान्यता देने के लिए किसी भी कदम का विरोध करता है, यह विश्वास करता है कि इस पर बातचीत की मध्य पूर्व शांति समझौते का इंतजार करना चाहिए.

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता हीथर नॉर्ट ने कहा कि राज्य विभाग ने गुरुवार को अपने फैसले से यूनिस्को के निवर्तमान निदेशक-डायरेक्टर जनरल इरीना बोकोवा को सूचित कर दिया. उन्होंने कहा, यह निर्णय हल्के ढंग से नहीं लिया गया, यूनेस्को में बढ़ते इजरायल-विरोधी पूर्वाग्रह, संगठन में मौलिक सुधार की आवश्यकता अमेरिकी चिंताओं को दर्शाता है.

वहीँ इजरायल के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत डैनी दानन ने कहा कि यह फैसला “इजरायल के खिलाफ भेदभाव का भुगतान करने की कीमत” है.

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