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वॉशिंगटन. भारत, जापान और दक्षिण कोरिया समेत आठ देशों को अमेरिका ने ईरान से तेल आयात करने की मंजूरी दे दी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी है।

बता दें कि ईरान के कच्चे तेल के ज्यादातर बड़े खरीददार एशिया से हैं। ये सभी देश चाहते हैं कि बैन के बावजूद अमेरिका उन्हें ईरान से कच्चा तेल खरीदने की इजाजत दे। वहीं अमेरिका भी न्यूक्लियर डील पर ईरान से नए सिरे से बातचीत करना चाहता है, लेकिन ईरान इसके लिए तैयार नहीं है।

बताया जा रहा है कि ईरान को बातचीत के लिए मजबूर करने के इरादे से ही अमेरिका ईरान की अर्थव्यवस्था को अस्त व्यस्त करना चाहता है और इसलिए उसने दुनिया के कई देशों को 4 नवंबर के बाद से ईरान से तेल आयात पर रोक लगाने की बात कही है।

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चीन के अधिकारी ने बताया है कि अमेरिका से उनकी भी बातचीत हो रही है और जल्द ही भारत की तरह उन्हें भी छूट मिल जाएगी। भारत, चीन के बाद ईरान के तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है. इससे पहले कहा जा रहा था कि भारत ईरान से अपने कच्चे तेल खरीद को 2017-18 में 2.26 करोड़ टन सालाना (452,000 बैरल प्रति दिन) से 1.5 करोड़ टन प्रति वर्ष (3,00,000 बैरल प्रति दिन) तक सीमित करने के लिये तैयार हो गया है।

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका भारतीय प्रस्ताव से संतुष्ट है और उसने तेल खरीद के लिए सशर्त छूट देने पर सहमति जता दी है। अमेरिका चाहता है कि भारत की तरफ से ईरान को भुगतान एक एस्क्रौ अकाउंट (निलंब खाते) में किया जाएगा, जिसका उपयोग ईरान भारत से कोई भी वस्तु खरीदने के लिए कर सकता है।

एस्क्रौ अकाउंट एक ऐसा खाता होता है, जिसमें किसी भी परियोजना का भुगतान खास मद में इस्तेमाल के लिए प्रतिबंधित करते हुए रख दिया जाता है।एस्क्रौ अकाउंट की शर्त के जरिए अमेरिका तेल भुगतान से मिलने वाले पैसे को ईरान तक पहुंचने से रोकना चाहता है, जिससे ईरानी अर्थव्यवस्था को तेल बिक्री का कोई खास लाभ नहीं मिलेगा।

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