म्यांमार में सैन्य अभियान के नाम पर रोहिंग्या मुस्लिमों का कत्लेआम जारी है. इस मामले में अमेरिका ने भी म्यांमार की आलोचना करते हुए सयुंक्त राष्ट्र से तत्काल कार्रवाई की मांग की है. इसी के साथ अमेरिका ने रोहिंग्‍या मुस्लिमों के लिए 3.2 अरब डॉलर की मदद भी दी है.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के कार्यवाहक सहायक सचिव सिमोन हेनशॉ ने न्यूयॉर्क में जारी संयुक्त राष्ट्र महासभा अधिवेशन में कहा कि यह सहायता अप्रत्याशित पीड़ा से गुजर रहे रोहिंग्या मुसलमानों की मदद के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता दर्शाता है.

सिमोन ने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि उसका यह योगदान अन्य देशों को भी रोहिंग्या मुसलमानों को सहायता प्रदान करने के लिए प्रेरित करेगा. इसी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सयुंक्त राष्ट्र से इस मामले में ‘मजबूत और तेज’ कार्रवाई का आग्रह किया हैं.

ट्रम्प ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका म्यांमार के रोहिंगिया मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा को खत्म करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से “मजबूत और तेज कार्रवाई” चाहता है. वहीँ उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने म्यांमार के सैन्य अभियान की आलोचना की और कहा, म्यांमार सेना ने सरकारी चौकियों पर हमले का जवाब भारी भयावहता के साथ दिया.

उन्होंने म्यांमार सेना को हिंसा का अंत करने के लिए एक अमेरिकी कॉल को दोहराया और रोहिंग्या के दीर्घकालिक समाधान के लिए राजनयिक प्रयासों का समर्थन किया.

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