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अमेरिकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने म्यांमार से रॉयटर्स के दोनों पत्रकारों को जल्दी से जल्दी रिहा करने को कहा है।जिनको देश की खुफिया जानकारियां रखने का दोषी ठहराकर सात साल की सजा सुनाई गई है। हालांकि इन दोनों पत्रकारों ने दुनिया के सामने रोहिंग्याओं पर अत्याचार का खुलासा किया था।

बता दें कि लोन (32) और क्यो सो ओ (28) नामक दोनों ये पत्रकार अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के लिए काम करते हैं। दोनों पत्रकारों को यह सजा रोहिंग्या संकट पर उनके द्वारा की गई रिपोर्टिंग में म्यांमार के सरकारी गोपनीयता कानून का उल्लंघन करने के सिलसिले में सुनाई गई है।

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मंगलवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति पेंस ने ट्वीट करते हुए कहा कि दोनों पत्रकारों की इस बात के लिए सराहना करनी चाहिए, न कि उसे कैद में डाल देना चाहिए कि उन्होंने मानवाधिकार उल्लंघन और नरसंहार का खुलासा करने का काम किया। इसके बाद ट्वीट करते हुए पेंस ने कहा कि धर्म की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता मजबूत लोकतंत्र के लिए आवश्यक हैं। माइक पेंस ने लिखा कि रोहिंग्या लोगों पर अत्याचार की रिपोर्टिंग करनेवाले दो पत्रकारों को सात साल की सजा मिलने की खबर पाकर वो बहुत दुखी हुए। म्यांमार की सेना से इस सजा को पलटने और दोनों पत्रकारों को रिहा करने को कहा गया है।

मामले में यंगून कोर्ट के जज ये ल्यून ने कहा कि दोनों पत्रकारों ने देश के उद्देश्यों को नुकसान पहुंचाने का काम किया है, जिसकी वजह से उन्हें सीक्रेट एक्ट के उल्लंघन का दोषी पाया जाता है। कोर्ट ने कहा, ‘चूंकि उन्होंने गोपनीयता कानून के तहत अपराध किया है, दोनों को सात-सात साल जेल की सजा सुनाई जा रही है।’

पत्रकार ला लोन और क्याव सोई ओ दिसंबर से म्यांमार की जइनसेनी जेल में बंद हैं। दोनों को यंगून में पुलिस ने खाने पर आमंत्रित किया गया था और रेस्टोरेंट से निकलने के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया था। अदालत से सजा पाए वा लोन ने कहा कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया और उन्हें किसी तरह का डर नहीं है। लोन ने कहा, ‘मैं न्याय, स्वतंत्रता और लोकतंत्र में विश्वास करता हूं।’ रॉयटर्स के संपादक स्टीफन जे एडलर ने कहा, ‘यह म्यांमार, रॉयटर्स के पत्रकार वा लोन व क्यो सो ओ और प्रेस के लिए एक बुरा दिन है।’

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