चीन में लाखों उइगर मुसलमानों को शिविरों में कैद करने की रिपोर्ट सामने आने के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ की टीम ने करीब तीन हफ्ते पहले चीन का दौरा किया था। टीम ने कहा था कि ये समझ के बाहर है कि उइगर समुदाय के लोगों को चीन ने री एजुकेशन कैंप में क्यों रखा है।

इस मामले में अब संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि उइगर मुस्लिम समुदाय के लोगों को बड़े पैमाने पर हिरासत में रखने की रिपोर्ट से वह चिंतित है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि आतंकवाद से निपटने के बहाने हिरासत में रखे गए इन लोगों को रिहा किया जाना चाहिए।

हालांकि बीजिंग ने आरोपों से इनकार किया है लेकिन यह भी स्वीकार किया है कि कुछ धार्मिक चरमपंथियों को फिर से शिक्षित करने के लिए हिरासत में रखा गया है। चीन ने प्रांत में अशांति के लिए इस्लामिक आतंकवादियों और अलगाववादियों को जिम्मेदार ठहराया है।

कुछ दिन पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार पैनल की एक रिपोर्ट में कहा था कि इस बात की विश्वसनीय रिपोर्ट्स हैं कि चीन ने 10 लाख उइगर मुसलमानों को खुफिया शिविरों में कैद कर रखा है। हालांकि, चीन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था।

इसके अलावा अमेरिका के 17 सांसदों ने भी पत्र लिखकर उइगर मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर ट्रंप प्रशासन से चीन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उइगरों को बंदी बनाने में लिप्त चीनी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने की अपील की है।

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