म्यांमार के सुरक्षा बलों ने रोहिंग्या मुसलमानों पर जुल्मों और ज्यादती की सभी हदे पार करते हुए रोहिंग्या मुसलमानों की सामूहिक रूप से हत्याएं की साथ ही उनकी महिलाओं के साथ सामूहिक रुप से बलात्कार किया. इस बात का खुलासा संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में हुआ हैं. संयुक्त राष्ट्र ने इसे जातीय सफाया का नाम दिया हैं.

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय की और से जारी रिपोर्ट में कहा गया कि ‘Area clearance operations’ के नाम पर सैकड़ों की संख्या में हत्याएं हुई हैं. ये रिपोर्ट अपनी जान बचाकर बांगलादेश पहुंचे  204 रोहिंग्या शरणार्थियों के बयानों के आधार पर हैं.

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इसके अलावा 101 महिलाओं के भी बयान दर्ज किये गए जिनमे आधे से अधिक महिलाओं ने बताया कि उनके साथ बलात्कार किया गया. संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं को कई महिलाओं ने बताया कि कैसे उनके सामने उनके नवजात शिशु सहित उनके युवा बच्चों को मारा गया. उन्होंने बताया कि उनके बच्चों को काट दिया गया, कुचल दिया गया.

सुरक्षा बलों ने पूरे गांव में आग लगाईं, उसके बाद बड़े पैमाने पर हत्याए की गई, बलात्कार किये गये और उनके खाद्यान सामग्री को भी जला दिया गया. संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि ऐसी भी खबर हैं कि 6 साल के तीन बच्चों की चाकू से काटकर उनकी बलि भी दी गई.

इसी के साथ संयुक्त राष्ट्र की और से कहा गया कि एक आठ महीने के बच्चें की भी निर्मम तरीके से हत्या की गई और उसकी मां के साथ पांच सुरक्षा अधिकारियों ने सामूहिक दुष्कर्म किया.

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