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120 से अधिक देशों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के जेरुसलम पर लिए गए फैसले को गलत करार देते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा में तुर्की और यमन के प्रस्ताव को अपना समर्थन दिया. जिसमे जेरुसलम को इजरायल की राजधानी घोषित करना गलत करार दिया गया.

ट्रंप ने प्रस्ताव से पहले उन देशों को वित्तीय सहायता में कटौती करने की धमकी दी थी, जो पक्ष में वोट देते है, लेकिन कुल 128 देशों ने प्रस्ताव का समर्थन किया, 35 देशों ने हिस्सा नहीं लिया बल्कि 9 देशों ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया.

ट्रम्प की इस धमकी को उन अरब देशों ने भी खारिज कर दिया. जिन्हें अमेरिका की और से सैन्य सहायता मिलती है. इन देशों में मिस्र, जॉर्डन, सऊदी अरब और इराक जैसे सहयोगी देश है. इसके अलावा ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और जापान जैसे प्रमुख अमेरिकी सहयोगियों ने भी प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया.

सयुंक्त राष्ट्र के इस कदम के बाद ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका इस फैसले को हमेशा याद रखेगा. फ़िलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इसे फिलिस्तीन के लिए एक जीत बताया. जबकि इजरायल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस प्रस्ताव को “असंतोषजनक” कहकर खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, जेरूसलम हमारी राजधानी है और सदैव रहेगी.

संयुक्त राष्ट्र के अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने 193 सदस्यीय महासभा को बताया, “संयुक्त राज्य अमेरिका इस दिन को याद रखेगा जिसमें एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में हमारे अधिकार का प्रयोग करने के लिए महासभा में हम पर हमला किया गय.” उन्होंने कहा, “हम इसे याद करेंगे जब हमें एक बार फिर से संयुक्त राष्ट्र में दुनिया का सबसे बड़ा योगदान देना होगा.”

ध्यान रहे इस महीने की शुरुआत में ट्रम्प ने संयुक्त राज्य अमेरिका की और से घोषणा करते हुए अमेरिका की दशकों में चली आ रही विदेश  नीति को उलट दिया था और यरूशलेम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता दी थी, साथ ही घोषणा की थी कि वह अपने दूतावास को वहां स्थानांतरित करेगा.

इस फैसले के विरोध में सोमवार को अरब और मुस्लिम देशों के अनुरोध पर 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सोमवार को प्रस्ताव लाया गया था. जिसे संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने सहयोगी इजरायल के समर्थन में वीटों  कर दिया था. जबकि 14 देशों ने प्रस्ताव का समर्थन किया था.

हालांकि इस प्रस्ताव में ट्रम्प और उनके फैसले का उल्लेख नहीं किया गया था लेकिन उन्होंने “यरूशलेम की स्थिति से संबंधित हाल के फैसलों पर गहरा अफसोस व्यक्त किया.

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