संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने 2020 में इजरायली सैनिकों द्वारा 6 फलस्तीनी बच्चों की हत्या को “अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन” करार दिया है। फिलिस्तीनी क्षेत्र में मानव अधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधि माइकल लिनक और संयुक्त राष्ट्र के एग्नेस कैलमार्ड ने ने गुरुवार को एक संयुक्त बयान में टिप्पणी की।

उन्होने कहा, “इजरायल की सेना द्वारा अली अयमान अबू आलिया की हत्या” – उन परिस्थितियों में जहां इजरायल सुरक्षा बलों को मौत या गंभीर चोट का कोई खतरा नहीं था – अंतर्राष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन है। दोनों ने कहा, “जानबूझकर घातक बल केवल तभी उचित होता है जब सुरक्षाकर्मी घातक बल या गंभीर नुकसान का तत्काल खतरा हो।”

4 दिसंबर को फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि रामल्लाह के उत्तर में मुगलेर गाँव में प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प के दौरान लड़के के पेट में गोली दागी गई थी। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने कहा कि अबू आलिया वेस्ट बैंक में रहने वाला छठा फलस्तीनी बच्चा था जिसे 2020 में इजरायली सुरक्षा बलों ने गोली मारकर हत्या की।

संयुक्त बयान में कहा गया है कि 1 नवंबर, 2019 से 31 अक्टूबर, 2020 के बीच अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्र में इजराइली सुरक्षा बलों द्वारा 1,048 फिलिस्तीनी बच्चों को जख्मी किया गया है।

उन्होंने कहा, “बच्चों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत विशेष संरक्षित अधिकारों का संरक्षण मिलता है,” उन्होंने जोर देते हुए कहा, “इनमें से प्रत्येक हत्या इजरायल के अपने मानवाधिकारों और मानवीय कानून के अधिकारों के पालन के बारे में गहरी चिंताओं को उठाती है।”

पिछले महीने, फिलिस्तीनी सूचना मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इजरायली सैनिकों ने जानबूझकर फिलिस्तीनी बच्चों को निशाना बनाया,  सितंबर 2000 में दूसरा इंतिफादा (विद्रोह) शुरू होने के बाद से कम से कम 3,097 फिलिस्तीनी नाबालिगों ने इजरायली बलों के हाथों अपनी जान गंवाई।

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