यूक्रेन ने रूस द्वारा तीन नौसैनिक जहाजों को कब्जे में लेने के बाद बढ़े तनाव के बीच मार्शल लॉ की घोषणा कर दी है।इस मामले में गहन चर्चा के बाद 276 सांसदों ने 30 दिन के लिये सीमावर्ती क्षेत्रों में मार्शल लॉ लगाने के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि मार्शल लॉ का मतलब युद्ध का ऐलना करना नहीं बल्कि यूक्रेन की सुरक्षा की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाना है। वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल के साथ फोन पर बातचीत की और मार्शल लॉ लगाने पर चिंता व्यक्त की। पुतिन ने कहा कि कीव ने यह कार्रवाई यूक्रेन में चुनाव अभियान को देखते हुए की है। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जर्मनी यूक्रेन के अधिकारियों को आगे कोई लापरवाही भरा कदम उठाने से रोकने के लिए राजी कर सकता है।

मार्शल लॉ लागू होने के बाद यूक्रेन के अधिकारियों को सैन्य अनुभव रखने वाले नागरिकों को संगठित करने, मीडिया को नियंत्रित करने और प्रभावित क्षेत्र में सार्वजनिक रैलियों को प्रतिबंधित करने का अधिकार मिल गया है। रूस का कहना है कि अगले साल होने जा रहे चुनावों को ध्यान में रखते हुए यूक्रेन रविवार को हुए टकराव को राष्ट्रपति पोरोशेंको के पक्ष में भुनाना चाहता है। वह पश्चिमी देशों को बहकाकर रूस पर और प्रतिबंध लगाने के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है।

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बता दें कि रविवार को कीव के तीन जहाजों को जब्त कर लिया। रूस ने आरोप लगाया कि अजोव सागर में क्रीमिया के तट के पास जहाज अवैध तरीके से रूसी जल क्षेत्र में प्रवेश कर रहे थे। यूक्रेन और उसके पश्चिमी सहयोगियों का कहना है कि रूस ने अवैध तरीके से जलसंधि को अवरूद्ध किया और जहाज और नाविकों को बंधक बनाकर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया है।

इस मामले में  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपात बैठक बुलाई गई जिसमें अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने रूस को गैर कानूनी कार्रवाई के लिये चेतावनी दी है। वहीं योरपीय संघ ने कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि रूस कर्च स्ट्रेट ([जलमार्ग)] में स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करे। हम सभी से संयम बरतने और स्थिति को सामान्य करने की अपील करते हैं।’

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