तुर्की के राष्ट्रपति ने शुक्रवार को कहा कि सभी तैयारियां पूरी करने के बाद, हागिया सोफिया में 24 जुलाई को शुक्रवार की नमाज अदा की जाएगी। अनादोलु एजेंसी ने एक रिपोर्ट में ये जानकारी दी।

राष्ट्र के लिए एक संबोधन में, राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने हागिया सोफिया की नई स्थिति पर अपनी टिप्पणी दी – जिसका उपयोग पिछले दशकों के लिए एक संग्रहालय के रूप में किया गया था, लेकिन शुक्रवार को हाल ही में अपनाई गई डिक्री के बाद इसे एक मस्जिद का दर्जा मिलेगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि हागिया सोफिया के दरवाजे तुर्क, विदेशी, मुस्लिम और गैर-मुस्लिमों के लिए खुले रहेंगे, जैसा कि अन्य सभी मस्जिदों में होता है।

बीबीसी के अनुसार, इससे पहले शुक्रवार को ही तुर्की की एक अदालत ने हागिया सोफ़िया म्यूज़ियम को मस्जिद में बदलने का रास्ता साफ़ कर दिया था। कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा था कि हागिया सोफ़िया अब म्यूज़ियम नहीं रहेगा और 1934 के कैबिनेट के फ़ैसले को रद्द कर दिया।

जानकारी के अनुसार, इस विश्व प्रसिद्ध इमारत का निर्माण लगभग 532 ईस्वी में बाइजेंटाइन साम्राज्य के शासक जस्टिनियन ने किया था। उस समय इस शहर को कुस्तुनतुनिया या कॉन्सटेनटिनोपोल के नाम से जाना जाता था। 537 ईस्वी में निर्माण पूर्ण होने के बाद इस इमारत को चर्च बनाया गया।

हालांकि 1453 में इस्लामी ऑटोमन साम्राज्य सुल्तान मेहमत द्वितीय के हाथों इस शहर पर जीत के बाद कुस्तुनतुनिया का नाम बदलकर इस्तांबुल कर दिया गया। वहीं कुछ साल बाद इस चर्च में खरीदकर मस्जिद बना दिया। पहले विश्व युद्ध में तुर्की की हार के बाद 1934 में इस मस्जिद (मूल रूप से हागिया सोफ़िया चर्च) को म्यूज़ियम बनाने का फ़ैसला किया गया।

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