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तुर्की की जनता रविवार 24 जून को देश के राष्ट्रपति और संसद के चुनाव के लिए मतदान करेगी। इस राष्ट्रपति चुनाव में वर्तमान राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान सहित 6 लोग राष्ट्रपति पद के लिए मैदान में हैं।

इस चुनाव या फिर आठ जुलाई को मतदान के दूसरे दौर के बाद, राष्ट्रपति एर्दोगान की पसंद के अनुसार बना तुर्की का नया संविधान भी लागू हो जायेगा। इसके प्रावधानों के अनुसार राष्ट्रपति के साथ-साथ पहली बार संसद के लिए भी मतदान हो रहा है।

नया संविधान तुर्की के राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि जब कभी उसे लगे कि किसी मामले में पहले से कोई क़ानून नहीं है, या किसी क़ानून में कोई कमी है, तो वह अध्यादेश जारी कर सकता है। अध्यादेश की न तो संसद द्वारा पुष्टि की और न ही उसे लागू करने के लिए कोई आपातकाल घोषित करने की ज़रूरत होगी।

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source: haaretz

प्रेक्षकों का मानना है कि रविवार के चुनाव में राष्ट्रपति एर्दोआन को दो प्रतिद्वंद्वियों से कड़ी टक्कर मिल सकती है, उदारवादी पार्टी ‘सीएचपी’ के नेता मुहर्रम इन्जे और नवगठित राष्ट्रवादी पार्टी ‘आईवाईआई’ की नेता मेराल अक्सेनर से। इन दोनों की पार्टियों ने दो और पार्टियों के साथ मिलकर चुनावी गठबंधन बनाया है।

विदेशों में, मुख्य रूप से जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों में रहने वाले तुर्की नागरिक अपने निकटस्थ तुर्की राजदूतावास या वाणिज्य दूतावास में जा कर 24 जून से पहले ही मतदान कर चुके हैं। अकेले जर्मनी में ही 14 लाख तुर्कों के पास मताधिकार है।

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