तुर्की के उपराष्ट्रपति फिएट ओकटे ने कहा है कि अगर बाकू द्वारा अंकारा से सैनिकों की मांग का अनुरोध किया जाता है तो अज़रबैजान के लिए सैन्य सहायता प्रदान करने में तुर्की संकोच नहीं करेगा। हालांकि फिलहाल ऐसा कोई अनुरोध नहीं मिला।

इससे पहले, आर्मेनिया के प्रधान मंत्री ने कहा कि उन्होंने अजरबैजान के साथ नागोर्नो-करबाख संघर्ष में इस स्तर पर एक राजनयिक समाधान की कोई संभावना नहीं देखी। अंकारा ने बाकू के साथ पूर्ण एकजुटता की कसम खाई है और येरेवन पर अजरबैजान की जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया है।

बुधवार को ब्रॉडकास्टर सीएनएन तुर्क के साथ एक साक्षात्कार में बोलते हुए, ओकटे ने ओएससीई के मिन्स्क समूह की भी आलोचना की। जिससे इस संघर्ष में मध्यस्थता के लिए गठित किया गया था। जिसके सदस्य फ्रांस, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका है।

इस संगठन ने संघर्ष को सुलझाने के बजाय इस मुद्दे को अनसुलझे रखने और राजनीतिक रूप से और सैन्य रूप से अर्मेनिया का समर्थन करने की कोशिश की। इसी बीच अजरबैजान के राष्ट्रपति ने घोषणा की कि आर्मेनिया के कब्जे से फुजौली, जेबरेयिल और जांगिलान प्रांतों में अज़रबैजान सेना ने 21 और गांवों को मुक्त कर दिया है।

इल्हाम अलीयेव ने ट्विट किया, “अजरबैजान की गौरवशाली सेना ने जुबेरिल जिले के फुजौली जिले के जेजेगज़लू, आशगी सेइदामहादली और ज़ेर्गर गांवों को मुक्त कर दिया है। जेरेबील जिले के बालंद, पपीस, टुलस, हाज़ीली और तिनली गाँव हैं। जियो अज़रबैजान की सेना! करबख़ अजरबैजान है!”

एक अन्य ट्वीट में, अलीयेव ने कहा कि सेना ने “मिनजीवन शहर, और खुरमा, खुमारली, सरिल, बबेली, उचुनजू अगाली, हजल्ली, जिराख मुस्लान, उडगुन, तुराबबाद, इचरी मुसलान, मेलिकली, जहांगीरबेली और बहारली गांवों को भी अर्मेनियाई कब्जे से मुक्त कर दिया है।

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