Wednesday, June 23, 2021

 

 

 

एर्दोगन के बयान पर तुर्की और ईरान ने ‘गलतफहमी’ को किया हल

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अज़रबैजान की राजधानी बाकू में तुर्की राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान द्वारा अज़ारी-ईरानी कविता पढ़े जाने से उपजे विवाद को हल करने पर तुर्की और ईरान सहमत हो गए। अज़रबैजान की अर्मीनिया पर जीत हुई सेना की विजय परेड में एर्दोगान ने ये कविता पढ़ी थी।

इस कविता के पढ़े जाने को लेकर ईरान के विदेश मंत्रालय ने तुर्की के राजदूत को तलब कर विरोध जताया था। ईरान के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को अपनी वेबसाइट पर लिखा, “तुर्की के राजदूत को बता दिया गया है कि दूसरों की ज़मीन पर दावा करने और विस्तारवादी देशों का दौर जा चुका है। ईरान किसी को भी अपनी अखंडता में दख़ल देने की इजाज़त नहीं देता।”

वहीं ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने ट्वीट किया कि राष्ट्रपति एर्दोगन को नहीं पता है कि जो उन्होंने बाकू में गलत तरीके से पढ़ा है उसका अर्थ ईरान की मातृभूमि से उसके इलाकों को जबरदस्ती अलग करना है। इस पर तुर्की ने भी  ईरानी राजदूत को तलब किया था। राजधानी अंकारा में राजदूत मोहम्मद फ़राज़मंद को तुर्की के विदेश मंत्रालय द्वारा तुर्की और एर्दोगन के खिलाफ निराधार आरोपों की निंदा सुनने के लिए बुलाया गया था।

हालांकि अब अंकारा में ईरानी दूतावास ने रविवार को घोषणा की कि तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन द्वारा अज़रबैजान की राजधानी बाकू की यात्रा के दौरान सुनाई गई कविता के बारे में तुर्की के साथ “गलतफहमी” सुलझ गई है। दूतावास ने बताया कि विदेश मंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ और उनके तुर्की समकक्ष मेवलुत कैवुसोग्लू ने इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए फोन पर बात की।

ज़रीफ़ ने एर्दोगन और वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को बनाए रखने के महत्व पर बल दिया। मंत्री ने आपसी विश्वास के संदर्भ में दोनों देशों के बीच संबंधों को विकसित करने की उम्मीद की।

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