भारत के फखरुल इस्लाम जिन्हें दुनिया अब फ्रैंक एम.इस्लाम के नाम से जानती हैं. जिनकी गिनती आज अमेरिका के टॉप बिज़नेसमैन में की जाती हैं. उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के मुस्लिम बैन की आलोचना की हैं. उन्होंने इस तथाकथित ट्रेवल्स बैन को अमेरिका के अन्धकार युग का प्रतीक करार दिया.

उत्तर प्रदेश के छोटे शहर आजमगढ़ के रहने वाले फ्रैंक इस्लाम का मानना हैं कि  ट्रंप द्वारा आव्रजकों के खिलाफ उठाए गए कदमों के बावजूद अमेरिका समावेशी समाज बना रहेगा. उन्होंने कहा, “मुस्लिमों पर रोक गलत, शर्मनाक और गैरसंवैधानिक है.

उन्होंने आगे कहा, यह वह नहीं है जो हम हैं. यह अमेरिकी मूल्य नहीं है. इस तरह का प्रतिबंध अमेरिका के अंधकारपूर्ण और कुरूप अतीत का प्रतिनिधित्व करता है. हम अमेरिकी इतिहास के एक अंधकारपूर्ण अध्याय में प्रवेश कर चुके हैं.” उन्होंने कहा कि ट्रंप को यह समझना होगा कि अमेरिका में, विशेषकर सिलिकॉन वैली में, 35 फीसदी व्यापार आव्रजकों की वजह से है जो न केवल संपदा का निर्माण कर रहे हैं बल्कि दूसरों को रोजगार भी दे रहे हैं.

इस्लाम ने कहा, “मैं अब भी सुनहरा क्षितिज देख रहा हूं. मुझमें आशा और उम्मीद है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम आज भी उम्मीदों, इच्छाओं और सपनों को जन्म दे सकते हैं, न कि डर, अवसाद और गुस्से को.” इस्लाम ने कहा कि ट्रंप उन मूल्यों के प्रतिनिधि नहीं हैं जिन पर अमेरिका खड़ा है. उन्होंने साथ ही कहा कि ‘भारत को अमेरिका से सीखना चाहिए कि सफल होने के लिए कैसे सभी को अवसर दिया जाना जरूरी है.’

इस्लाम ने 2007 में अपने कारोबार को 70 करोड़ डालर में बेच दिया और अपनी पत्नी के साथ मिलकर फ्रैंक इस्लाम एंड डेबी ड्रीजमैन फाउंडेशन की स्थापना की. यह फाउंडेशन नागरिक, शैक्षिक एवं कला संबंधी क्षेत्रों में कार्यरत समूहों की आर्थिक मदद करता है.

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