7 मुस्लिम देशों के नागरिकों पर अस्थायी बैन के फैसले के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारत को झटका देते हुए एच-1बी बिल कांग्रेस में पेश कर दिया हैं. जिसके कारण देश की टॉप 4 आईटी कंपनियां इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो और टेक महिंद्रा के शेयर 3—4 प्रतिशत तक गिर गए. इससे एक अनुमान के मुताबिक भारतीय टेक कंपनियों को करीब 44 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है.

इस बिल के कानून बन जाने से अमेरिकी कंपनियों के लिए बाहर से लोगों की नियुक्ति करना मुश्किल हो जाएगा. बिल में कहा गया है कि एच—1बी वीजा पर रहने वालों की सैलरी कंपनियों को दो गुनी करते हुए 1.30 लाख डॉलर सालाना करनी होगी. जोकि अभी सिर्फ 60000 डॉलर ही है. अगर ऐसा नहीं किया गया तो भारतीय इंजीनियर की बजाए वहां किसी अमेरिकी की नियुक्ति करनी होगी.

इस बिल को कैलिफोर्निया के सांसद जोए लोफग्रेन ने हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में पेश करते हुए कहा कि ‘यह मार्केट-बेस्ड सलूशन पेश करता है जो उन कंपनियों को प्राथमिकता देता है जो सबसे ज्यादा वेतन देना चाहती हैं. यह अमेरिकी नियोक्ता की उस टैलेंट तक पहुंच सुनिश्चित करता है जिसकी उन्हें जरूरत है.

वहीँ सीनेटर शेरॉड ब्राउन ने ऐलान किया है कि वह सीनेट में एच-1बी ऐंड एल-1 वीजा रिफॉर्म ऐक्ट पेश करेंगे जो उनके मुताबिक अमेरिकी कर्मचारियों और वीजा धारकों दोनों को पहले से ज्यादा सुरक्षा देगा.  ब्राउन ने कहा, ‘हमें अमेरिकन फेयर वेजेज से बचने के लिए धोखाधड़ी और दुरुपयोग का सहारा लेने और विदेशी कर्मचारियों का शोषण करने वाली कंपनियों पर शिकंजा कसने की जरूरत है.

इस बिल पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत के हितों और चिंताओं से अमेरिकी प्रशासन और अमेरिकी कांग्रेस दोनों के वरिष्ठ स्तरों को अवगत करा दिया गया है.


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