वाशिंगटन | पिछले तीन सालो में दुनिया के लगभग सभी देशो का दौरा करने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी की विदेशी नीति सफल होती नही दिख रही है. दुनिया के दो बड़े देश ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका ने दो दिन के अंतराल में कुछ ऐसे कड़े फैसले लिए है जिसका सबसे ज्यादा प्रभाव भारतीय पेशेवरो पर पड़ा है. सोमवार को जहाँ ऑस्ट्रेलिया ने 457 वीजा कार्यक्रम पर रोक लगा दी वही मंगलवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए.

डोनाल्ड ट्रम्प के इस आदेश पर हस्ताक्षर करने के बाद भारतीय आईटी कंपनियों सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी. यह नीती लागू होने के बाद अमेरिकन कंपनियों को अमेरिकी पेशवरो को नौकरी में प्राथमिकता देनी होगी. इसके अलावा आदेश में यह भी कहा गया है की अमेरिकी संघी एजेंसीज को अमेरिकी कंपनियों से ही सामान खरीदने पर बाध्य होना पड़ेगा.

दरअसल ट्रम्प ने चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था की वो H-1B वीजा के दुरूपयोग को बंद करेगे. ट्रम्प का मानना था की H-1B वीजा के जरिये अमेरिकियों की नौकरियों को छिना जा रहा है. इस आदेश पर हस्ताक्षर होने के बाद ट्रम्प प्रशासन H-1B वीजा के दुरूपयोग की समीक्षा करेगा. इससे सबसे ज्यादा अगर कोई प्रभावित हुआ है वो भारतीय आईटी कंपनिया है. मालूम हो की अमेरिका में हर साल करीब 85 हजार लोग इस वीजा का इस्तेमला करते है.

फ़िलहाल अमेरिका में भारतीय आईटी कंपनियों का कारोबार 150 अरब डॉलर का है. लेकिन इस आदेश के बाद इनके राजस्व में कमी आने का अंदेशा है. इसक कारण यह है की H-1B वीजा के तहत अमेरिका की ज्यादातर आईटी कंपनी विदेशियों को नौकरी पर रखती है. क्योकि गैर अमेरिकी कम वेतन पर काम करने के लिए तैयार हो जाता है जबकि अमेरिकियों को ज्यादा वेतन देना पड़ता है.

हालाँकि आईटी कंपनियों का कहना है की ज्यादातर अमेरिकी पेशावर आईटी क्षेत्र में काम करना नही चाहते लेकिन ट्रम्प प्रशासन का ऐसा मानना नही है. इसलिए ऑस्ट्रेलिया के बाद अमेरिका में भी भारतीय पेशवरो के लिए भविष्य में काम करना मुश्किल हो जायेगा. बताते चले की सोमवार को ऑस्ट्रेलिया ने 457 वीजा कार्यक्रम पर रोक लगा दी थी. इस वीजा कार्यक्रम के जरिये विदेशी नागरिको को उन क्षेत्रो में काम करने की इजाजत मिलती थी जहाँ ऑस्ट्रेलियाई क्रमिको की काफी कमी थी.

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