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नाइजीरिया के “जरीए” शहर में शेख ज़कज़की और उनके समर्थकों का बड़े पैमाने पर पश्चिमी समर्थित नाइजीरिया की सरकार द्वारा दमन जारी है, मीडिया की चुप्पी इस मुद्दे पर हैरान करने वाली है। पिछले 2 साल में शेख ज़कज़की के 6 बेटों और उनके सैंकड़ों समर्थकों को मौत के घाट नाइजीरियन फौज के द्वारा उतारा जा चुका है और आज भी बड़े पैमाने पर नाइजीरिया में मानवाधिकारों का उल्लंघन जारी है।

नाइजीरिया में जारी इस नरसंहार के पीछे की असली वजहों का जानना बेहद ही जरूरी है। शेख ज़कज़की के समर्थकों का यह दमन गुडलक जोनाथन के राष्ट्रपति बनने के बाद बड़ी तेजी से बढ़ता है, गुडलक जोनाथन के राष्ट्रपति बनने के बाद से लगातार सऊदी और इसरायली इंटेलिजेंस का दखल नाइजीरिया के आंतरिक मामलों में बढ़ता गया है।

नाइजीरियन फौज का कहना है कि ज़कज़की के समर्थक सड़कों को जाम कर रहे थे इसलिए उन्हें ये “ज़रिए” शहर में बलप्रयोग करना पड़ा जिसमे सैंकड़ों लोग मारे गये लेकिन सवाल यहाँ पर ये उठता है कि क्या शांतिपूर्वक तरीके से अपने धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करना एक लोकतान्त्रिक देश में गुनाह है? इस नरसंहार की असली वजहों में बारे में संक्षेप से नीचे चर्चा की गयी है।

सबसे पहला कारण ये है कि साम्राज्यवादी ताकतों द्वारा लगातार लंबे समय से नाइजीरिया को धर्म के आधार पर बांटने का खेल जारी है जिसे शेख ज़कज़की ने समय रहते समझ लिया और इस खेल का जवाब पूरे देश को एकजुट कर के बखूबी दे दिया। नाइजीरिया के अंदर प्राकृतिक संसाधन बहुत बड़ी मात्रा में हैं जिनमे मुख्य रूप से तेल, प्राकृतिक गैस, टिन, लोहा, कोयला, जिंक, अराबले, नाइओबियम, लीड, लाइमस्टोन शामिल हैं। पश्चिमी देशों की कंपनियों द्वारा नाइजीरिया के इन प्राकृतिक संसाधनों की लूट बड़े स्तर पर जारी है, शेख ज़कज़की हमेशा से इस पश्चिमी देशों की कंपनियों के द्वारा की जा रही प्राकृतिक संसाधनों की लूट के धुर विरोधी रहे हैं। इसी वजह से शेख ज़कज़की को पश्चिमी आकाओं के कहने पर नाइजीरिया की सरकार द्वारा बार बार निशाना बनाया जा रहा है।

शेख ज़कज़की को निशाना बनाये जाने का एक अन्य कारण है शेख ज़कज़की का फिलिस्तीन का समर्थक होना, वे पूरे अफ्रीका में फिलिस्तीन के सबसे बड़े हिमायती माने जाते हैं और हर साल वे क़ुद्स दिवस पर फिलिस्तीन के समर्थन में लाखों लोगों की रैलियां नाइजीरिया में आयोजित करते रहे हैं। शेख ज़कज़की नाइजीरिया में बढ़ते हुए सऊदी अरब समर्थित वहाबियत के भी धुर विरोधी रहे हैं। सऊदी अरब के समर्थन से ही अबूबकर गुमी के नेतृत्व में 1978 में वहाबी आंदोलन “इज़ाला” की शुरुआत उत्तरी नाइजीरिया में हुई। अबूबकर गुमी ने ही सऊदी अरब की आर्थिक मदद से ही उत्तरी नाइजीरिया में सूफी सुन्नियों को खत्म करने का एक व्यापक अभियान शुरू किया। इसके बाद नाइजीरिया के अंदर सऊदी समर्थित वहाबियों की बाढ़ सी आ गयी जिसमे जफ़र महमूद अदम नाम के वहाबी को सऊदी अरब के द्वारा दी गयी व्यापक आर्थिक मदद भी शामिल है।

शेख ज़कज़की ने नाइजीरिया के अंदर बढ़ते हुए वहाबियत के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ा और बड़े पैमाने पर वहाबियत के ऊपर रोक लगाने में उन्हें सफलता प्राप्त हुई और इसी वजह से वो सऊदी अरब के निशाने पर आ गए। इन वजहों से शेख ज़कज़की और उनके समर्थकों का नरसंहार पश्चिमी समर्थित नाइजीरिया की सरकार द्वारा जारी है। यह समय की जरुरत है कि दुनिया के अमनपसंद लोग नाइजीरिया में जारी इस नरसंहार के खिलाफ आवाज़ उठाएं और शेख ज़कज़की की रिहाई के लिए नाइजीरिया की सरकार पर दबाव बनाएं।


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