लाखों रोहिंग्या शरणार्थियों ने रविवार को म्यांमार से बांग्लादेश में अपने पलायन की दूसरी वर्षगांठ को नर’सं’हार दिवस के रूप में मनाया। इस दौरान एक रैली एक रैली का आयोजन किया गया। जिसमे उन्होंने म्यांमार को उनकी नागरिकता और अन्य अधिकार प्रदान करने की मांग की।

बता दें कि हाल ही में बांग्लादेश ने यू.एन. शरणार्थी एजेंसी की मदद से 3,450 रोहिंग्या मुसलमानों का प्रत्यावर्तन शुरू करने का प्रयास किया। लेकिन सुरक्षा और म्यांमार के आत्मविश्वास की कमी का हवाला देते हुए कोई भी स्वेच्छा से वापस जाने के लिए सहमत नहीं हुआ। यूएनएचसीआर ने गुरुवार को कहा कि प्रत्यावर्तन के लिए आत्मविश्वास का निर्माण आवश्यक था।

रोहिंग्या शरणार्थियों के म्यांमार जाने से इंकार के बाद बांग्लादेश की प्रधान मंत्री शेख हसीना ने कहा कि उनका प्रशासन दक्षिण एशियाई देश पर भारी बोझ के बावजूद उन्हें वापस भेजने के लिए बल का उपयोग नहीं करेगा। 1 मिलियन से अधिक रोहिंग्या बांग्लादेश में रहते हैं।

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इस दौरान म्यांमार के सैनिकों और बौद्ध मिलिशिया द्वारा हत्याओं, बलात्कार और आगजनी के हमलों के पीड़ितों के लिए प्रार्थना भी आयोजित की गई थी। इस दौरान इमाम ने कहा, अल्लाह, हमें अपने जीवन में शांति के लिए कितना खून देना है? हम दशकों से अपना खून बहा रहे हैं और अब हम यहां हैं। कृपया हमारी मदद करें, हम वापस जाना चाहते हैं।

रविवार के विरोध के आयोजकों में से एक, मुहिब उल्लाह ने कहा, “हम दुनिया को बताना चाहते हैं कि हम अपने अधिकारों को वापस चाहते हैं, हम नागरिकता चाहते हैं, हम अपने घरों और जमीन को वापस चाहते हैं।” “म्यांमार हमारा देश है। हम रोहिंग्या हैं।”

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