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अमेरिका के पूर्व वित्त मंत्री लारेंस एच समर्स ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लिए गये नोट बंदी के फैसले को अनुचित बताते हुए कहा कि नोटबंदी से भारत में सिर्फ आम लोग प्रभावित हो रहे हैं, उन्होंने आगे कहा कि इससे भ्रष्टाचार पर रोक नहीं लगेगी.

समर्स ने कहा, ‘अमेरिका और यूरोप में बड़े नोटों को बंद करने के पीछे मैंने जो कारण दिया था वह गरीब भारत पर लागू नहीं होता.’ उन्होंने कहा, ‘हमारा मानना है कि अवैध तरह से पैसा कमाने वाले अपनी काली कमाई कैश के रूप में नहीं रखते हैं। बल्कि वह पहले ही उसे विदेशी मुद्रा, सोना या किसी अन्य रूप में बदलवा लेते हैं.

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हार्वड विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र की रिसर्च छात्रा नताशा सरिन के साथ लिखे ब्लॉग में उन्होंने इस फैसले के लॉन्ग टर्म में फायदे पर भी संदेह जताते हुए कहा कि इस फैसले से लोगों का सरकार पर से भरोसा उठ गया है. इसके साथ ही उन्होंने 1000 और 500 रुपये के नोट बंद करने को एक नाटक करार दिया.

उन्होंने 1000 और 500 रुपये के नोट बंद करने के फैसले पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि दुनिया में कहीं भी मुद्रा नीति में हुआ सबसे व्यापक बदलाव है. समर्स ने लिखा कि 500 रुपए का नोट करीब 7.30 डॉलर के बराबर होता है. वहीं अमेरिका का सबसे बड़ा 100 डॉलर का नोट वहां चंद लोगों के पास ही होता है.

उन्होंने लिखा है कि 86 प्रतिशत नोट बंद करने से भारत में खलबली और अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई है. छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारी जो अपना अधिकतर बिजनस कैश से ही करते हैं, उनकी दुकानें वीरान नजर आ रही हैं. आम भारतीयों का पिछला हफ्ता पुराने नोट बदले जाने की उम्मीद में बैंकों के सामने ही खड़े गुजरा.

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