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म्यांमार में रोहिंग्या मुसलामानों के खिलाफ सुरक्षा बलों और स्थानीय बौद्ध समुदाय द्वारा जारी हिंसा को रोके जाने को लेकर यूरोपीय संसद ने प्रस्ताव पास किया हैं. यूरोपीय संसद ने प्रस्ताव पारित कर तत्काल म्यांमार सरकार से रोहिंग्या मुसलामानों के खिलाफ हिंसा को रोके जाने की मांग की.

यूरोपीय संसद ने म्यांमार की विदेश मंत्री और सत्तारूढ़ नेश्नल यूनियन फ़ाॅर डेमोक्रेसी की प्रमुख आंग सान सूची से मांग की है कि वे भेदभाव और रोहिंग्या मुसलमानों के विरुद्ध अपराध करने वालों को क़ानूनी छूट देने की नीति समाप्त करें. इसके साथ ही अतिवादी बौद्ध गुटों के द्वेषपूर्ण विचारों को समाप्त करने के लिए आवश्यक क़दम उठाने की बात कही ताकि रोहिंग्या मुसलमानों के नागरिक अधिकारों की रक्षा की जा सके.

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हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी संस्था यूएनएचसीआर के प्रमुख जॉन मैकइस्सिक ने ताजा हिंसा के बारें में कहा हैं कि म्यांमार रोहिंग्या मुसलमानों का खात्मा चाहता है. म्यांमार के रखाईन प्रांत में रहने वाले रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ सुरक्षाबलो और सैन्य बलों ने एक अभियान चला रखा है. सैन्य बल वहां कत्लेआम आम कर रहा है. पुरुषो को गोली मारी जा रही है, उनके घर जलाए जा रहे है और महिलाओं के साथ बलात्कार किया जा रहा है. उन्होंने इसे रोहिंग्या मुसलमानों के जातीय सफाए की संज्ञा दी.

संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार, दुनिया में सबसे पीड़ित अल्पसंख्यकों में रोहिंग्या मुसलमान हैं जिसकी म्यांमार में 11 लाख के करीब आबादी हैं. बर्मा ह्यूमन राइट्स नेटवर्क (BHRN) के अनुसार म्यांमार सरकार अंतरराष्ट्रीय कानून का जानबूझकर उल्लंघन कर रही है और विश्व को किए वादे को ताक पर रख अपराध कर रही है.

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