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श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरीसेना के संसद भंग करने के आदेश को पलट दिया है।अदालत ने सिरीसेना की ओर से चुनाव की तैयारियों पर भी रोक लगा दी है।

बता दें कि श्रीलंका की मुख्य राजनीतिक पार्टियों और चुनाव आयोग के एक सदस्य ने सोमवार को राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना को सुप्रीम कोर्ट में घसीटते हुए संसद भंग करने के उनके विवादित फैसले को चुनौती दी थी। इंडिया टुडे ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया है।

सुनवाई के दौरान अदालत में बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। जजों ने कमांडोज की घेरेबंदी के बीच यह अहम निर्णय दिया। श्रीलंका की मुख्य राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ चुनाव आयोग के एक सदस्य ने भी राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना के संसद भंग करने के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी थी।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अपदस्थ किए गए रानिल विक्रमसिंघे ने खुशी जताते हुए ट्वीट किया है। विक्रमसिंघे ने लिखा, ‘जनता को पहली जीत मिली है। अभी और बढ़ना है और अपने प्यारे देश में लोगों को एक बार फिर से संप्रभुता की बहाली करनी है।’

श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने 26 अक्टूबर को प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया था। लेकिन, बीते शुक्रवार को जब राजपक्षे की पार्टी ने बहुमत न जुटा पाने की बात कही तो राष्ट्रपति ने संसद को भंग कर पांच जनवरी को मध्यावधि चुनाव कराने की घोषणा कर दी।

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