म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमों पर लगातार हिंसा जारी है. जिसके चलते 3000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके है तो वहीँ 400000 के करीब लोग बांग्लादेश पलायन कर चुके है.

दुनिया भर में रोहिंग्या मुस्लिमों पर इस अत्याचार की आलोचना हो रही है. सयुंक्त राष्ट्र संघ रोहिंग्या मुस्लिमों पर म्यांमार सेना की कार्रवाई को जातीय सफाए की संज्ञा दे चूका है.

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हालांकि इस पुरे मामले में म्यांमार की चांसलर और नोबेल विजेता आंग सान सू ची से इस नरसंहार को रोके जाने की मांग की जा रही है. लेकिन इस नरसंहार को केवल एक ही शख्स रोक सकता है और वह है म्यांमार के सेना प्रमुख मिन ऑन्ग लैंग.

दरअसल, आंग सान सू ची की सरकार के पास देश के गृह, रक्षा और सीमा मामलों में हस्तक्षेप करने का को अधिकार नहीं है. इन सभी मामलों को सेना देखती है. विशेषकर हिंसा प्रभावित रखाइन की कमान जनरल लैंग खुद संभालता हैं.

‘बर्मा कैम्पेन यूके’ के मार्क फ़्रैमनर का कहना है कि नरल मिन ऑन्ग लैंग म्यांमार में वो अकेले शख़्स हैं जो रोहिंग्या गांवों में हमले कर रहे सैनिकों को रुकने का आदेश देने का अधिकार रखते हैं.

उनका कहना है कि जनरल मिन ऑन्ग लैंग के सैनिक ही रोहिंग्या मुसलमानों की हत्या कर रहे हैं. उन्होंने ब्रिटेन के विदेश मंत्री को म्यांमार के सेना प्रमुख की आलोचना करने की अपील की.

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