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बीजींग | चीन के शिनजियांग प्रांत में एक बड़ी आबादी मुस्लिमो की है. उइगर समुदाय के ये लोग चीन के उत्पीडन से खासे परेशान रहते है. चीन, मुस्लिमो को किसी भी हाल में उनके धार्मिक कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोकने में लगा हुआ रहता है. चूँकि अब रमजान का पाक महीना चल रहा है इसलिए चीन ने अब मुस्लिमों की जासूसी शुरू कर दी है.

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के कैडर इस काम को करने में जुटे हैं. इस बात का खुलासा ह्युमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) की इसी हफ्ते आई रिपोर्ट में हुआ है. जिसमे कहा गया कि वे शिंग्जियांग ओइगर ऑटोनॉमस रीजन (एक्सयूएआर) में सामाजिक स्थिरता बरकरार रखने के लिए ऐसा कर रहे हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है, “री-एजुकेश्नल कैंपों में दौरों के बीच अधिकारी मुसलमानों से उनकी जिंदगी और राजनीतिक विचारों के बारे में पूछताछ करते हैं. एक तरह से वे उनका ‘राजनीतिक शुद्धिकरण’ करना चाहते हैं.”

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एचआरडब्ल्यू की रिसर्चर माया वैंग ने बताया कि शिंग्जियांग में रहने वाले मुस्लिम परिवार इस वक्त अपने ही घर में कड़ी निगरानी के बीच रहने को मजबूर हैं. यहां तक कि वह क्या खाते और कब सोते हैं, इस बारे में सीपीसी को खबर रहती है.इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि हजारों मुसलमानों को रि-एजुकेशन कैंप में हिरासत में रखा गया है.

जर्मनी के कॉर्नटल स्थित यूरोपियन स्कूल ऑफ कल्चर एंड थिओलॉजी के एड्रियन जेंज की रिपोर्ट में बताया गया कि प्रांत में मुस्लिम परिवारों की निगरानी रखे जाने के कारण, वे एक तरह से री-एजुकेश्नल कैंपों में रह रहे हैं. जेंज इसे सांस्कृतिक क्रांति के बाद की सबसे तीव्र मुहिम मानते हैं, जिसके जरिए सोशल इंजीनियरिंग को अंजाम दिया जा रहा है.

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