मिस्र के अलअजहर के प्रमुख शेख अहमद तय्यब ने मलेशिया की राजधानी जकारता में मुस्लिम बुद्धजीवियों और धर्मगुरुओं के साथ एक सामूहिक बयान में कहा कि शिया और सुन्नी इस्लाम के दो हाथ हैं, इसलिए उन्हें एक दूसरे के करीब आना चाहिए।

अहमद तैयब इस समय अलअजहर युनिवर्सिटी के विद्वानों के साथ इंडोनेशिया में मौजूद हैं जहां उन्होंने इंडोनेशिया के उलेमा की बैठक में इस्लामी दुनिया के मुसलमानों में पाये जाने वाले मतभेद के विषय में चेतावनी दी।

उन्होंने कहा कि इस्लाम धीरज और सहिष्णुता का धर्म है जो अपने दामन में सभी धर्मों को जगह देता है।

उन्होंने एकता और अखंडता पर बल देते हुए कहा कि एकता का मतलब यह नहीं है कि किसी एक ही सिद्धांत को स्वीकार किया जाए क्योंकि वैचारिक मतभेद तो स्वाभाविक समस्या है, बल्कि एकता का मतलब यह है कि एक दूसरे को काफ़िर करार देने से परहेज किया जाए।

उन्होंने चरमपंथी विचारधारा की आलोचना करते हुए कहा कि जो लोग काबे (मक्के) की ओर रुख करके नमाज़ पढ़ते हैं उनकी निन्दा उचित नहीं है। इसलिए किसी को काफिर करार देकर मारना गैरइस्लामी प्रक्रिया है चाहे वह शिया हो या सुनी। (hindkhabar.in)

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