तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन ने यूएन सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग उठाते हुए कहा कि 7 अरब लोगों को पांच देशों के भरोसे नहीं छोड़ जा सकता है।

एर्दोआन ने कहा, “पांच देशों के न्याय पर 7 अरब लोगों के भाग्य को छोड़ना न तो टिकाऊ है और न ही उचित। उन्होने कहा, लोकतांत्रिक, पारदर्शी, जवाबदेह, प्रभावी और निष्पक्ष प्रतिनिधित्व पर आधारित परिषद की संरचना मानवता के लिए एक आवश्यकता बन गई है।”

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की 75 वीं वर्षगांठ पर दिये संदेश में एर्दोआन ने कहा, “मेरा मानना ​​है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा को मजबूत करने और पुनर्जीवित करने से हमारी समस्याओं का समाधान मिलेगा।” एर्दोआन ने कहा कि अत्यधिक लालच, अहंकार, शक्ति का एकाधिकार और नए तरीकों का उपयोग करके उपनिवेशवाद को जारी रखने की इच्छा वैश्विक प्रणाली में फैल रहे न्याय की सबसे बड़ी बाधाएं हैं।

एर्दोआन ने कहा, “दुनिया के विभिन्न हिस्सों में, खासकर सीरिया, फिलिस्तीन, यमन और अफगानिस्तान में स्थिरता हासिल करने में विफलता इस बात का प्रमाण है।” एर्दोआन ने यू.एन. को “महाद्वीपों के चौराहे” इस्तांबुल को अपना केंद्र में बदलने का विचार भीपेश किया, जो वैश्विक शांति और स्थिरता के प्रयासों का समर्थन करेगा।

एर्दोआन ने जोर देकर कहा कि यू.एन की 75 वीं वर्षगांठ पूरे विश्व के लिए दबाव के मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया में सुधार करने के अवसर प्रदान करती है। उन्होने कहा, हम, मानवता के रूप में, कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना कर रहे हैं जो हमारे स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था, सामाजिक शांति और भविष्य को प्रभावित करते हैं, विशेष रूप से कोरोनोवायरस महामारी। जहां दुनिया भर के 170 मिलियन लोगों को सहायता और सुरक्षा की तत्काल आवश्यकता है।

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