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बिहार के किशनगंज में जन्मे वैज्ञानिक डॉ. मुमताज नैयर ने साउथेम्प्टन यूनिवर्सिटी में पोस्टडोक्लोरल में अपनी टीम के साथ मिलकर जेका, डेंगू और हेपेटाइटिस सी वायरस के खिलाफ एक टीका विकसित किया है. इन बीमारियों से दुनिया भर लाखों लोग प्रभावित है.

विश्वभर के वैज्ञानिकों ने डॉ नैयर के इस खोज को क्रांतिकारी खोज बताया है जिससे उन्होंने बिहार का ही नहीं बल्कि पूरे देश का दुनिया में रोशन किया है. विज्ञान इम्यूनोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने दिखाया है कि नेचुरल किलर सेल्स (एनके सेल्स), जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का एक मूलभूत हिस्सा हैं, जैसे ज़िका, डेंगू और हेपेटाइटिस सी वायरस जैसे वैश्विक रोगजनकों सहित KIR2DS2 नामक एक एकल रिसेप्टर पर पहचान सकती हैं.

इस बारें में मुमताज ने कहा कि  “यह एक अच्छी तरह से प्रस्तुत अध्ययन और इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति है जो रिसेप्टर के KIR2DS2 की महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानती है. चूंकि मैं भारत से आया हूं, जहाँ हर साल डेंगू के हजारों मामलों होते है, मैं डेंगू से मरीजों की पीड़ा को समझ सकता हूं. इन डेंगू प्रभावित रोगियों की पीड़ा को कम करने के लिए मुझ से ज्यादा खुशी किसी को नहीं होगी.

इस संबंध में जानकारी प्रदान करते हुए डॉक्टर नीर ने बताया कि उन्होंने अपनी टीम के साथ विश्वविद्यालय साउथ थींपटन की प्रयोगशाला में पिछले पांच सालों से इस पर काम करने के बाद इस टीके की तैयारी की दिशा में सफलता प्राप्त की है. यदि यह टीका सफल हो जाता है, तो दुनिया भर में क्रांतिकारी दवा पैदा हो जाएगी और दुनिया भर के लाखों लोगों को इन बीमारियों से बचा लिया जाएगा.

डॉक्टर नैयर ने कहा कि उनकी टीम का रिसर्च दुनिया भर के प्रतिष्ठित मेडिकल और साइंस जर्नल, साइंस एमयोंनॉलोजी में प्रकाशित हुई है. जिसमें शोधकर्ताओं ने शरीर की एम्योन सिस्टम के बुनियादी हिस्सा नेचरल केलर सेल्स (एन के सेल्स) पर एक ऐसा शोध किया है, जो कई प्रकार के बीमारियों से लड़ने और वायरस का इलाज करने में एक प्रमुख भूमिका निभा सकता है

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