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मिस्र के अल-शोरोक अखबार के मुताबिक, सऊदी अरब के शक्तिशाली क्राउन प्रिन्स मोहम्मद बिन सलमान ने ईरान और कट्टरपंथी इस्लामवादी समूहों के “बुराई के त्रिकोण” में तुर्की भी शामिल है. क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने तुर्की पर इस्लामी खलीफा बहाल करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया, खिलाफत-ए-उस्मानिया को लगभग एक सदी पहले खत्म कर दिया गया था.

उनकी रिपोर्ट में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तय्यिप एर्दोगान के सऊदी अरब के गहरे संदेह को दर्शाया गया है. जिनकी सत्तारूढ़ एके पार्टी की इस्लामी राजनीति में इसकी जड़ें मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि, सऊदी और क़तर के विवादों में  तुर्की क़तर का समर्थन कर रहा है.

तुर्की ने हाल ही के महीनों में उत्तरी सीरिया में लड़ाई को कम करने की कोशिश करने के लिए ईरान के साथ मिलकर काम किया है, जो मिडिल ईस्ट में सऊदी अरब के कट्टर प्रतिद्वंदी है. उन्होंने कहा कि, पिछले साल ईरान और तुर्की सेना प्रमुखों ने दोनों देशों का दौरा भी किया था.

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अल-शोरोक ने प्रिंस मोहम्मद का हवाला देते हुए कहा, “बुराई के समकालीन त्रिभुज में ईरान, तुर्की और उग्रवादी धार्मिक समूह शामिल हैं.” आपको बता दें कि, क्राउन प्रिंस ने अपना यह बयान मिस्र के अख़बार के संपादकों से अपने मिस्र के दौरे के दौरान दिया था.

उन्होंने कहा कि कतर के साथ विवाद लंबे वक़्त तक चल सकता है. आपको बता दें कि, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र और बहरीन ने पिछले जून में कतर के साथ कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों को खत्म कर दिया था. इसके साथ दुनिया के सबसे बड़े तेल, प्राकृतिक गैस के निर्यातक के साथ हवा और शिपिंग मार्गों को निलंबित कर दिया गया. जो इस क्षेत्र की सबसे बड़ी अमेरिकी सैन्य अड्डे का गण है.

हालांकि, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कहा कि कतर को इस महीने के आखिर में सऊदी अरब द्वारा आयोजित एक अरब सम्मेलन में शामिल होने से मना नहीं किया जाएगा.